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Energy & Agriculture Security: ईरान संकट के बीच देश में तेल, गैस और खाद का बंपर स्टॉक; कीमतों पर सरकार का बड़ा एलान

पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भीषण भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संकट के बीच केंद्र सरकार ने देश की आम जनता, घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश के भीतर कच्चे तेल, रसोई गैस (LPG), प्राकृतिक गैस और खेती के लिए सबसे जरूरी खादों (उर्वरकों) का पर्याप्त और बंपर भंडार (Buffer Stock) मौजूद है। इसलिए देशवासियों को किसी भी तरह की किल्लत या सप्लाई चेन रुकने की आशंका से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पूरी तरह चाक-चौबंद है। भारत के पास रणनीतिक भंडारों में 60 दिनों से अधिक की राष्ट्रीय खपत के लिए कच्चा तेल (Crude Oil) और नेचुरल गैस का एडवांस स्टॉक सुरक्षित है। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) कृषि बैठक के समापन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों को खाद की उपलब्धता और सब्सिडी को लेकर बड़ी खुशखबरी दी है।

घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़त: रसोई गैस (LPG) में देश हुआ आत्मनिर्भर

वैश्विक संकट के इस दौर में भारत ने एलपीजी (रसोई गैस) के घरेलू उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाकर विदेशी आयात पर अपनी निर्भरता को बेहद कम कर लिया है। सरकार द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार:

  • उत्पादन में भारी उछाल: पहले जहां भारत का घरेलू एलपीजी उत्पादन महज 32,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था, वह अब आधुनिक रिफाइनिंग क्षमता के दम पर बढ़कर 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन के स्तर को पार कर गया है।

  • 75-80 दिनों का एडवांस स्टॉक: वर्तमान में देश के पास 75 से 80 दिनों की खपत के लिए एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक देश के अलग-अलग बॉटलिंग प्लांट्स और डिपो में सुरक्षित रखा गया है, जिससे घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह निर्बाध बनी रहेगी।

दुनिया में बढ़े, पर भारत में घटे पेट्रोल-डीजल के दाम

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक बाजार से तुलना करते हुए भारतीय तेल प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने बताया कि मई 2022 से मई 2026 के बीच जहां दुनिया के विकसित देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही थीं और रिकॉर्ड महंगाई थी, वहीं दूरदर्शी नीतियों के कारण भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमतों में 3.1% की गिरावट दर्ज की गई है।

₹1 लाख करोड़ का सरकारी बोझ: हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में की गई ₹10 प्रति लीटर की भारी कटौती से सरकारी खजाने पर ₹1 लाख करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है, लेकिन सरकार ने राजकोषीय घाटे की चिंता न करते हुए यह पूरा लाभ देश की आम जनता की जेब तक पहुंचाया है।

  • वैकल्पिक ईंधन (E85) पर महामिशन: कच्चे तेल के आयात को स्थाई रूप से कम करने के लिए सरकार वैकल्पिक ग्रीन फ्यूल पर रॉकेट की रफ्तार से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक देश में ई85 (85% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) ईंधन पंपों की संख्या को बढ़ाकर 500 और दिसंबर 2027 तक इसे 5,000 के विशाल आंकड़े तक पहुंचाने का है।

किसानों के लिए वरदान: पुरानी रियायती दरों पर ही मिलेगी यूरिया और डीएपी

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के अन्नदाताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि खरीफ (Kharif) और रबी (Rabi) दोनों ही मुख्य फसलों के लिए देश के प्रत्येक राज्य में खाद की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है।

  • अग्रिम भंडारण व्यवस्था: चालू खरीफ सीजन के लिए सहकारी समितियों के पास पर्याप्त यूरिया और डीएपी (DAP) मौजूद है और आने वाले रबी सीजन के लिए भी अग्रिम (Advance) रसद व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

  • सब्सिडी का सुरक्षा कवच: वैश्विक कूटनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भले ही कच्चे माल और खादों की कीमतें बढ़ रही हों, लेकिन भारत के किसानों को यूरिया और डीएपी पुरानी रियायती (सब्सिडी वाली) दरों पर ही मिलती रहेगी। बढ़े हुए दामों का सारा अतिरिक्त वित्तीय बोझ केंद्र सरकार खुद उठाएगी और इसका ₹1 का भी असर किसानों पर नहीं आने दिया जाएगा।

'अल नीनो' और सूखे से निपटने का चक्रव्यूह तैयार

मौसम विज्ञान और भारतीय कृषि पर पड़ने वाले अल नीनो (El Nino) के नकारात्मक जलवायु प्रभावों पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार के पास इस स्थिति से निपटने के लिए एक मुकम्मल और वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन प्लान तैयार है। इसके साथ ही, देश की मिट्टी की सेहत सुधारने और लंबे समय तक टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) सुनिश्चित करने के लिए सरकार रासायनिक खादों के विकल्प के रूप में जैविक (Organic) और प्राकृतिक खेती को देशव्यापी स्तर पर बड़े प्रोत्साहन और वित्तीय मदद के साथ बढ़ावा दे रही है।

 

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