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Festival Inflation Shock: 1 अक्टूबर से महंगे होंगे AC, TV और वॉशिंग मशीन, त्योहारों से ठीक पहले जेब पर पड़ेगा भारी असर

दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सामान खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं को महंगाई का बड़ा झटका लगने जा रहा है। देश की प्रमुख कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनियों ने 1 अक्टूबर से एयर कंडीशनर (AC), टेलीविजन (Smart TV), वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। आमतौर पर त्योहारी सीजन में कंपनियां आकर्षक डिस्काउंट, ऑफर्स और ईएमआई स्कीम्स पेश करती हैं, लेकिन इस बार इनपुट लागत में भारी उछाल और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने की वजह से कंपनियों को अपनी कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में त्योहारों के दौरान नए अप्लायंसेज खरीदकर घर को अपग्रेड करने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट पर इसका सीधा असर पड़ना तय है।

कच्चे माल की कीमतों में जबरदस्त उछाल और सप्लाई चेन का संकट

इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुख बुनियादी कच्चे माल की कीमतों में आई भारी तेजी है।

  • धातुओं के भाव रिकॉर्ड स्तर पर: टीवी, एसी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन के निर्माण में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कॉपर (तांबा), एल्युमिनियम और स्टील के वैश्विक दामों में पिछले कुछ महीनों में 15 से 20 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया है।

  • कंप्रेसर और मोटर की लागत बढ़ी: एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर में इस्तेमाल होने वाले कंप्रेसर तथा वॉशिंग मशीन की मोटरों में तांबे की भारी खपत होती है, जिससे उपकरणों के इन मुख्य पुर्जों की निर्माण लागत सीधे तौर पर बढ़ गई है।

  • ओपन-सेल और डिस्प्ले पैनल्स महंगे: स्मार्ट टीवी की कुल लागत का लगभग 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा उसके डिस्प्ले पैनल (Open-Cell) का होता है। वैश्विक स्तर पर पैनल निर्माताओं द्वारा उत्पादन में कटौती और आपूर्ति बाधित होने के चलते ओपन-सेल के आयात मूल्य में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

समुद्री भाड़ा और लॉजिस्टिक्स लागत में कई गुना इजाफा

कच्चे माल के अलावा अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई (Global Shipping & Freight Rates) में आया भारी उछाल भी कीमतों में आग लगाने का बड़ा कारण बना है।

  • कंटेनर दरों में तेजी: भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक व्यापारिक जलमार्गों में सुरक्षा जोखिमों के चलते कंटेनर शिपिंग चार्ज पिछले कुछ महीनों में दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं।

  • आयात निर्भरता का असर: हालांकि भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत असेंबलिंग बढ़ी है, लेकिन सेमीकंडक्टर चिप्स, हाई-एंड डिस्प्ले और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए घरेलू कंपनियां अभी भी चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देशों से होने वाले आयात पर निर्भर हैं। माल ढुलाई का यह अतिरिक्त खर्च कंपनियां सीधे तौर पर अंतिम ग्राहकों की जेब पर डालने जा रही हैं।

किस उपकरण पर कितना बढ़ेगा दाम: संभावित बजट का गणित

1 अक्टूबर से लागू होने वाले नए मूल्य निर्धारण के तहत विभिन्न श्रेणियों के उपकरणों पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि देखने को मिल सकती है:

  • स्मार्ट टीवी (Smart TV): 32-इंच के बजट मॉडल्स में 800 से 1,500 रुपये तक और 43-इंच से लेकर 55-इंच व उससे बड़े 4K टीवी मॉडल्स की कीमतों में 2,500 से 4,500 रुपये तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

  • एयर कंडीशनर (AC): स्प्लिट और इन्वर्टर एसी की कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है, जिससे प्रति यूनिट 1,500 से 3,000 रुपये तक का अंतर आएगा।

  • रेफ्रिजरेटर (Refrigerator): सिंगल डोर फ्रिज में 800 से 1,200 रुपये और डबल-डोर या फ्रॉस्ट-फ्री मॉडल्स में 2,000 से 3,500 रुपये तक का इजाफा देखा जा सकता है।

  • वॉशिंग मशीन (Washing Machine): सेमी-ऑटोमैटिक और फुली-ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीनों की कीमतों में 1,000 से 2,500 रुपये तक की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

कंपनियों का रुख: मार्जिन बचाने के लिए दाम बढ़ाना मजबूरी

एलजी (LG), सैमसंग (Samsung), वोल्टास (Voltas), डाइकिन (Daikin), पैनासोनिक (Panasonic) और हायर (Haier) जैसी प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से बढ़ी हुई इनपुट लागत का बोझ खुद वहन कर रहे थे ताकि मांग बनी रहे। लेकिन अब कच्चे माल और शिपिंग लागत का दबाव इतना अधिक हो चुका है कि मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कीमतों में संशोधन करना अपरिहार्य हो गया है।

कंपनियों का यह भी कहना है कि वे त्योहारी सीजन को देखते हुए आक्रामक बैंक कैशबैक, नो-कॉस्ट ईएमआई और एक्सचेंज ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश करेंगी, लेकिन बेस प्राइस में इजाफे का असर अंतिम बिल पर जरूर झलकेगा।

ग्राहकों के लिए सलाह: क्या 1 अक्टूबर से पहले खरीदारी करना सही कदम है?

बाजार विशेषज्ञों और खुदरा विक्रेताओं का मानना है कि यदि किसी परिवार ने इस त्योहारी सीजन में टीवी, फ्रिज, एसी या वॉशिंग मशीन खरीदने की पक्की योजना बना रखी है, तो 1 अक्टूबर से पहले चल रहे स्टॉक पर खरीदारी कर लेना वित्तीय रूप से समझदारी भरा कदम हो सकता है। फिलहाल रिटेल स्टोर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर पुराना इनवेंटरी स्टॉक मौजूद है, जो पुरानी कीमतों पर ही उपलब्ध है। मूल्य वृद्धि प्रभावी होने से पहले खरीदारी करके उपभोक्ता 2,000 से 5,000 रुपये तक की सीधी बचत कर सकते हैं।

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