FSSAI की बड़ी सख्ती: खोया, पनीर, मांस-मछली के रखरखाव पर नई एडवाइजरी, तापमान बिगड़ा तो जब्त होगा सामान और होगी जेल

दशहरा, धनतेरस, दिवाली और छठ महापर्व के त्योहारी मौसम में दूध उत्पादों, मिठाइयों और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की मांग आसमान छूने लगती है। बाजार में इसी भारी मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोरी और घटिया रखरखाव का गंदा खेल भी शुरू हो जाता है। इसी पर लगाम लगाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए एक व्यापक और बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है। प्राधिकरण ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि खोया (मावा), पनीर, ताजे मांस और मछली जैसे जल्द खराब होने वाले (पेरिशेबल) खाद्य उत्पादों के रखरखाव, कोल्ड चेन स्टोरेज, ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) और बिक्री में अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय मानकों और तापमान नियंत्रण का उल्लंघन पाया गया, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत भारी जुर्माना, सामान की तत्काल जब्ती और 6 महीने तक की कैद की सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अक्सर देखा जाता है कि थोक मंडियों से खुदरा बाजारों तक खोया और पनीर को साधारण बोरियों या खुले बक्सों में बिना किसी तापमान नियंत्रण के सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लाया जाता है। इसी तरह खुले में बिना बर्फ या डीप फ्रीजर के मांस और मछली की बिक्री की जाती है। एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि ऐसे संवेदनशील उत्पादों में तापमान नियंत्रित न होने से हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव (Microorganisms) बिजली की तेजी से पनपने लगते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग और गंभीर संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
खेत से थाली तक नियंत्रित तापमान की बाध्यता: टूटने नहीं पाएगी कोल्ड चेन
प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा दिशा-निर्देशों में सबसे बड़ा जोर 'एंड-टू-एंड कोल्ड चेन' बनाए रखने पर दिया गया है। खाद्य कारोबारियों (FBOs) को यह साफ कर दिया गया है कि केवल अपनी दुकान या मुख्य गोदाम में फ्रिज या डीप फ्रीजर लगा लेना ही पर्याप्त नहीं होगा। उत्पाद के निर्माण या खरीद के स्रोत (सोर्सिंग) से लेकर परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और उपभोक्ता को अंतिम डिलीवरी तक हर एक चरण में निर्धारित तापमान बनाए रखना अनिवार्य होगा।
गाइडलाइन के तहत पनीर और खोया जैसे डेयरी उत्पादों को हमेशा 4 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर स्टोर और ट्रांसपोर्ट करना होगा। वहीं फ्रोजन मीट और मछली के लिए -18 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे का नियंत्रित फ्रीजिंग तापमान बनाए रखना अनिवार्य है, जबकि ताजे मांस-मछली के परिवहन में क्रश की हुई बर्फ की पर्याप्त परत और इंसुलेटेड बॉक्स का इस्तेमाल करना होगा। यदि जांच के दौरान किसी भी वाहन या गोदाम में उत्पाद का तापमान तय सीमा से अधिक पाया जाता है, तो उस खेप को तुरंत मानव उपभोग के लिए असुरक्षित मान लिया जाएगा।
जूट की बोरियों और अनुपयुक्त पैकेजिंग पर रोक: फूड-ग्रेड सामग्री का ही होगा इस्तेमाल
एफएसएसएआई ने खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग को लेकर भी कड़े नियम तय किए हैं। अक्सर ग्रामीण या कस्बाई इलाकों से आने वाले खोया और पनीर को पुरानी जूट की बोरियों, गंदे प्लास्टिक के कट्टों या अखबारों में लपेटकर भेजा जाता है। नई एडवाइजरी के तहत गैर-खाद्य सुरक्षित (Non Food-Grade) पैकेजिंग सामग्री के उपयोग पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
कारोबारियों को अब केवल प्रमाणित 'फूड-ग्रेड' कंटेनरों, बटर पेपर, वैक्यूम पैकेजिंग या फूड-ग्रेड प्लास्टिक ट्रे का ही उपयोग करना होगा, जो खाद्य पदार्थों के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया न करें। इसके साथ ही, ढुलाई के दौरान उत्पादों को धूल, नमी, कीड़े-मकोड़ों, सीधे धूप और अन्य रसायनों के संपर्क से पूरी तरह सुरक्षित रखना होगा। क्रॉस-कंटामिनेशन (एक दूषित वस्तु से दूसरे में संक्रमण फैलना) को रोकने के लिए कच्चे मांस और पके हुए सामान को एक ही वाहन में बिना सीलबंद पार्टिशन के ले जाने की सख्त मनाही की गई है।
साफ-सुथरे ढके वाहनों में ही ढुलाई और ट्रेसबिलिटी का पूरा रिकॉर्ड अनिवार्य
एडवाइजरी के अनुसार, खोया, पनीर, मांस और मछली का परिवहन केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा जो पूरी तरह से ढके हुए, इंसुलेटेड या रेफ्रिजरेटेड हों। खुले ऑटो, ट्रैक्टर-ट्रॉली, बाइक पर बांधकर या सामान्य पिकअप वैन में बिना ढके इन संवेदनशील खाद्य पदार्थों को ले जाना कानूनन अपराध माना जाएगा। वाहन की नियमित रूप से धुलाई, सैनिटाइजेशन और उसका हाइजीन रिकॉर्ड मेंटेन रखना वाहन मालिक और व्यापारी दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी होगी।
इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण ने 'ट्रेसबिलिटी' (Traceability) यानी उत्पाद के मूल स्रोत का पता लगाने की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। कारोबारियों को हर खेप का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें सामान कहां से खरीदा गया, उसकी उत्पादन तारीख, बैच नंबर, ट्रांसपोर्टर का नाम और बिल की प्रतियां शामिल हों। जब भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी जांच के लिए पहुंचेंगे, तो व्यापारी को तुरंत खरीद और बिक्री का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करना होगा। बिल या स्रोत का वैध प्रमाण न मिलने पर उस सामग्री को संदिग्ध या सिंथेटिक (नकली) मानकर सीधे जब्त कर लिया जाएगा।
छापेमारी और जब्ती के आदेश: रेलवे और राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को मिला कड़ा निर्देश
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, भारतीय रेलवे और अपने सभी क्षेत्रीय निदेशकों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। अंतरराज्यीय सीमाओं, प्रमुख रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और थोक मंडियों में औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) के लिए विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें तैनात की जा रही हैं।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की विभिन्न धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई की जाएगी। असुरक्षित पाए जाने वाले पूरे स्टॉक को मौके पर ही सीज कर बुलडोजर से नष्ट करा दिया जाएगा, ताकि वह बाजार में न पहुंच सके। इसके साथ ही संबंधित दोषी कारोबारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, जिसमें भारी आर्थिक जुर्माने के अलावा कारावास का भी स्पष्ट प्रावधान है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह: खरीदारी करते समय इन बातों की करें जांच
प्राधिकरण ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे त्योहारी खरीदारी के दौरान जागरूक और सतर्क ग्राहक बनें। मिठाई, पनीर या मांस खरीदते समय दुकानदार की साफ-सफाई और स्टोर के तापमान पर जरूर ध्यान दें। बहुत अधिक सस्ते दाम पर मिलने वाले खुले खोया या पनीर से बचें, क्योंकि इनमें डिटर्जेंट, स्टार्च, यूरिया या रिफाइंड तेल की मिलावट का खतरा अधिक रहता है।
हमेशा एफएसएसएआई से पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठानों से ही खरीदारी करें और पक्का बिल जरूर मांगें। यदि आपको किसी दुकान, डेयरी या वेंडर के यहां खुले में सड़ी-गली सामग्री बिकती दिखे या हाइजीन का घोर अभाव नजर आए, तो आप तुरंत एफएसएसएआई के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' पोर्टल या राज्य के खाद्य सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।