FY26 में दिए ₹62,722 करोड़, पिछले 10 सालों में कुल योगदान ₹4.83 लाख करोड़ के पार

भारतीय उद्योग जगत में वेदांता लिमिटेड ने एक बार फिर अपनी आर्थिक मजबूती और राष्ट्र-निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण दिया है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली इस दिग्गज खनन और संसाधन कंपनी ने अपनी 11वीं टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट जारी की है, जिसके आंकड़े हैरान करने वाले हैं। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में वेदांता ने सरकारी खजाने में कुल ₹62,722 करोड़ का योगदान दिया है, जो कि कंपनी के परिचालन से हुई कुल कमाई का लगभग 36% हिस्सा है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 13.3% की भारी वृद्धि दर्शाता है।
पिछले एक दशक की शानदार गाथा
वेदांता का आर्थिक योगदान केवल एक साल तक सीमित नहीं है। कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के दौरान वेदांता ने भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल ₹4,83,034 करोड़ का योगदान दिया है। यह विशाल राशि देश के बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण और विकास योजनाओं को गति देने में सीधे तौर पर सहायक रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह योगदान उनके द्वारा अर्जित कुल राजस्व का 36 प्रतिशत है, जो भारत के आर्थिक विकास में उनके बड़े हिस्से को दर्शाता है।
कहाँ से आया सबसे बड़ा योगदान?
वेदांता के इस रिकॉर्ड तोड़ योगदान में विभिन्न वर्टिकल्स का अहम रोल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार:
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जिंक कारोबार: इस साल जिंक ने सबसे ज्यादा ₹19,053 करोड़ का योगदान दिया।
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एल्युमीनियम: वेदांता एल्युमीनियम की ओर से ₹15,788 करोड़ का योगदान आया।
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ऑयल एंड गैस: इस सेक्टर से सरकारी खजाने में ₹11,697 करोड़ जमा हुए।
टैक्स और रॉयल्टी के जरिए मजबूत किया भारत का वित्तीय आधार
वेदांता ने यह राशि केवल एक टैक्स के रूप में नहीं, बल्कि कई रूपों में जमा की है। कंपनी ने माइनिंग और हाइड्रोकार्बन प्रोडक्शन के लिए राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों को रॉयल्टी और प्रॉफिट पेट्रोलियम के तौर पर ₹14,840 करोड़ का भुगतान किया। इसके अलावा, कंपनी ने ₹21,777 करोड़ का इनडायरेक्ट टैक्स (CGST, SGST और IGST) जमा किया। साथ ही, इनकम और कैपिटल टैक्स के रूप में ₹8,290 करोड़ और डिविडेंड के रूप में सरकार को ₹1,180 करोड़ से अधिक की राशि मिली। इन आंकड़ों से साफ है कि वेदांता भारत की अर्थव्यवस्था की धुरी बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।