Global Oil Crisis: क्या बिखर रहा है तेल उत्पादक देशों का ओपेक संगठन? UAE के बाहर निकलने की चर्चा से मची खलबली

News India Live, Digital Desk: वैश्विक ऊर्जा बाजार में इस समय एक ऐसी खबर चर्चा में है जिसने कच्चे तेल की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा तेल निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ (OPEC) को छोड़ने की संभावनाओं को लेकर विश्लेषण तेज हो गए हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस संगठन के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतों और पाकिस्तान जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।क्यों ‘ओपेक’ छोड़ना चाहता है यूएई?यूएई और ओपेक के सबसे प्रभावशाली सदस्य सऊदी अरब के बीच पिछले कुछ समय से ‘तेल उत्पादन की सीमा’ (Production Quotas) को लेकर मतभेद चल रहे हैं:उत्पादन क्षमता में वृद्धि: यूएई ने अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है। वह अधिक तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है।ओपेक की पाबंदियां: ओपेक वर्तमान में कीमतों को ऊंचा बनाए रखने के लिए उत्पादन में कटौती कर रहा है, जो यूएई के आर्थिक हितों के खिलाफ जा रहा है।आर्थिक विविधीकरण: यूएई अपनी ‘विज़न 2030’ जैसी योजनाओं के लिए फंड जुटाना चाहता है, जिसके लिए उसे अधिक तेल निर्यात की आवश्यकता है।सऊदी अरब के लिए बड़ी चुनौतीसऊदी अरब ओपेक का अघोषित लीडर है। अगर यूएई बाहर निकलता है, तो:संगठन की साख गिरेगी: अंगोला और कतर के बाद यूएई जैसे बड़े उत्पादक का जाना ओपेक की ताकत को काफी कम कर देगा।प्राइस वॉर की स्थिति: उत्पादन सीमा हटने से बाजार में तेल की अधिकता हो सकती है, जिससे सऊदी अरब का राजस्व प्रभावित होगा।पाकिस्तान पर क्या होगा असर?पाकिस्तान, जो पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और महंगाई से जूझ रहा है, उसके लिए यह खबर ‘दोधारी तलवार’ जैसी है:कीमतों में गिरावट (फायदा): यदि ओपेक में फूट पड़ती है और यूएई उत्पादन बढ़ाता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर सकती हैं। इससे पाकिस्तान का आयात बिल कम होगा और पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है।कूटनीतिक संकट (नुकसान): पाकिस्तान के सऊदी अरब और यूएई दोनों के साथ गहरे संबंध हैं। इन दोनों देशों के बीच बढ़ती तल्खी पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से असहज कर सकती है, क्योंकि वह दोनों से ही आर्थिक मदद (कर्ज और निवेश) पर निर्भर है।वैश्विक तेल बाजार का भविष्यविशेषज्ञों का मानना है कि यूएई का बाहर निकलना ‘ऑयल इकोनॉमी’ के नए युग की शुरुआत हो सकता है। इससे अमेरिका और रूस जैसे गैर-ओपेक देशों की स्थिति और मजबूत होगी। यदि बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ती है, तो भारत और पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है।