Gold Price Today: यूएस डॉलर की मजबूती से सर्राफा बाजार में भारी गिरावट, सोना-चांदी धड़ाम; जानें 24K, 22K और 18K के ताजा भाव

ग्लोबल सर्राफा बाजार में मची हलचल का सीधा असर अब भारतीय बाजारों पर भी दिखने लगा है। अमेरिकी डॉलर के अपने रिकॉर्ड ऊंचे स्तर के पास बने रहने और अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' की महत्वपूर्ण बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क रुख के कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड टूटकर एक हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस हफ्ते आने वाले फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसलों और आर्थिक बयान पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जिससे भविष्य की मौद्रिक नीति का संकेत मिलेगा।
भारतीय सर्राफा बाजार (IBJA) में सोने और चांदी के नए रेट्स
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना 2,000 रुपये से अधिक फिसल गया है, वहीं चांदी में 7,000 रुपये प्रति किलो की भारी बिकवाली देखी गई है।
| धातुओं का प्रकार | शुद्धता (Purity) | IBJA का नया भाव (रुपये में) |
| 24 कैरेट सोना | 99.9% | ₹1,42,291 प्रति 10 ग्राम |
| 22 कैरेट सोना | 91.6% | ₹1,30,339 प्रति 10 ग्राम |
| 18 कैरेट सोना | 75.0% | ₹1,06,718 प्रति 10 ग्राम |
| चांदी (Silver) | 99.9% | ₹2,17,349 प्रति किलोग्राम |
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में एक हफ्ते के निचले स्तर पर भाव
अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार यानी कॉमेक्स (COMEX) पर स्पॉट गोल्ड 16 डॉलर प्रति औंस की गिरावट के साथ 4,022 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। यह 21 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स का अगस्त वायदा भी 0.9 प्रतिशत घटकर 4,038 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी भी टूटकर 57.11 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में आंकी जाने वाली बहुमूल्य धातुएं महंगी हो गई हैं, जिससे वैश्विक मांग में कमी आई है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है सोने की कीमतों पर दबाव?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर में ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती लागत के कारण महंगाई दर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी वजह से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है या इनमें बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि सोना हमेशा से ही महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश (Inflation Hedge) माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें निवेशकों का ध्यान बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों (जैसे सोने) से हटा देती हैं।
भविष्य का क्या है अनुमान और रिकवरी की संभावनाएं?
कमोडिटी मार्केट के विश्लेषकों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व अपनी इस बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन आगामी सितंबर में दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बाजार जानकारों ने साल के अंत तक के लिए सोने का लक्ष्य मूल्य 300 डॉलर घटाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। जानकारों के अनुसार, जब तक केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति में नरमी का रुख नहीं दिखता, तब तक सोने में बड़ी तेजी या रिकवरी आना मुश्किल है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के संकेतों के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, जो बाजार में अस्थिरता बढ़ा रहा है।
डिस्क्लेमर: सोने और चांदी में किया जाने वाला निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। बाजार में किसी भी प्रकार का लेन-देन या निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।