Grizzly Bear Attack Survival Story: शरीर पर 60 गहरे घाव, टूटी हड्डियां और बाहर दिखी किडनी; जानिए मौत के मुंह से कैसे बच निकला यह शख्स

जंगल में जंगली जानवरों से आमना-सामना होना किसी भी इंसान के लिए सबसे बुरे डरावने सपने जैसा होता है। लेकिन जब सामने सैकड़ों किलो वजनी खूंखार ग्रिजली भालू (Grizzly Bear) खड़ा हो, तो बचने की उम्मीद न के बराबर रह जाती है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाले 47 वर्षीय साइकिलिस्ट कॉलिन डॉवलर (Colin Dowler) के साथ घटी यह सच्ची और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना इंसान की अदम्य इच्छाशक्ति और जांबाजी की अनोखी मिसाल है।
भालू के जबड़ों में फंसने, शरीर पर 60 से ज्यादा गहरे घाव होने, जांघ की हड्डी तक दांत धंसने और पेट फटकर किडनी बाहर दिखने के बावजूद कॉलिन ने जिस तरह मौत को मात दी, वह पूरी दुनिया को हैरान कर रही है।
जंगल के संकरे रास्ते पर अचानक सामने आया 350 किलो का ग्रिजली भालू
यह घटना उस समय हुई जब कॉलिन माउंट डूगी डॉवलर के पास के घने जंगलों में हाइकिंग रूट्स तलाशने के लिए माउंटेन साइकिल से निकले थे। एक संकरे रास्ते पर अचानक उनका सामना एक विशालकाय ग्रिजली भालू से हो गया।
कॉलिन ने जानवर को डराने या उकसाने के बजाय साइकिल को अपने और भालू के बीच में ढाल बनाकर खड़ा कर लिया। उन्होंने भालू का ध्यान भटकाने के लिए अपना खाने का बैग भी दूर फेंका और हाथ में मौजूद हाइकिंग पोल आगे किया। लेकिन भालू ने पोल को चबाकर एक झटके में दूर फेंक दिया और तेजी से आगे बढ़ने लगा।
जबड़े में दबाकर 40 फीट दूर घसीटा, सुनाई दे रही थी हड्डियों की रगड़
कॉलिन ने अपनी जान बचाने की आखिरी कोशिश में साइकिल भालू की तरफ फेंक दी, लेकिन आक्रामक हो चुके भालू ने सीधे उनकी कमर और पेट पर छलांग लगा दी। भालू ने अपने नुकीले दांतों से कॉलिन के शरीर को जकड़ा और मुंह में दबाकर करीब 30 से 40 फीट दूर झाड़ियों में घसीट ले गया।
भालू ने कॉलिन की जांघ और पेट के हिस्से को बुरी तरह नोचना शुरू कर दिया। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कॉलिन को अपनी जांघ की हड्डी (Femur Bone) पर भालू के नुकीले दांतों के घिसने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। असहनीय दर्द और भारी खून बहने के बीच कॉलिन को लगने लगा था कि उनका अंत नजदीक है और उन्होंने मन ही मन अपनी पत्नी और बच्चों को अलविदा भी कह दिया था।
मुसीबत के बीच याद आया 2 इंच का पॉकेट चाकू
मौत के बिल्कुल मुहाने पर खड़े कॉलिन को अचानक याद आया कि उनकी जेब में एक छोटा सा पॉकेट नाइफ (Pocket Knife) रखा हुआ है। भारी भरकम भालू उनके शरीर के ऊपर चढ़ा हुआ था, लेकिन कॉलिन ने अपनी बची-खुची ताकत जुटाई और धीरे से अपनी जेब से चाकू निकाल लिया।
बिना एक पल गंवाए कॉलिन ने उस छोटे चाकू से भालू की गर्दन की नस पर पूरी ताकत से वार कर दिया। गर्दन से खून की धार फूटते ही भालू दर्द से छटपटाकर पीछे हटा और घने जंगलों की तरफ भाग निकला।
शर्ट से बनाया टॉर्निकेट, एक पैर से 45 मिनट तक चलाई साइकिल
भालू के जाने के बाद असली चुनौती शुरू हुई। कॉलिन के शरीर से फव्वारे की तरह खून बह रहा था। यदि चंद मिनटों में खून न रुकता तो उनकी मौत तय थी। कॉलिन ने तुरंत अपनी शर्ट की आस्तीन फाड़ी और जांघ पर कसकर बांधते हुए अस्थायी टॉर्निकेट (Tourniquet) बना लिया ताकि ब्लीडिंग रोकी जा सके।
गंभीर रूप से घायल और एक पैर के पूरी तरह बेकार हो जाने के बावजूद उन्होंने गिरी हुई साइकिल उठाई और केवल एक पैर से पैडल मारते हुए करीब 45 मिनट तक साइकिल चलाई। अंततः वे लकड़कट्टों के एक दूरदराज कैंप (Logging Camp) तक पहुंचे, जहां मौजूद 5 कर्मचारियों ने उन्हें देखकर तुरंत फर्स्ट एड दिया और एयर एंबुलेंस को बुलाया।
6.5 घंटे चली सर्जरी, 40 दिन तक अस्पताल में लड़ी जिंदगी की जंग
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम उनकी हालत देखकर स्तब्ध रह गई। कॉलिन के शरीर पर 60 से ज्यादा गहरे पंक्चर और घाव थे। हमले में उनका पेट इतना गहरा फट गया था कि उनकी किडनी बाहर दिखाई देने लगी थी।
डॉक्टरों ने करीब साढ़े छह घंटे तक लगातार जटिल सर्जरी कर उनकी जान बचाई। लगभग 40 दिनों तक गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) और अस्पताल में रहने के बाद कॉलिन पूरी तरह ठीक होकर अपने घर लौटे।