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HDFC Bank में LIC बढ़ाएगी अपनी हिस्सेदारी! RBI से 9.99% तक स्टेक खरीदने की मिली हरी झंडी, शेयरों पर पड़ेगा बड़ा असर

भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक जीवन बीमा कंपनी 'भारतीय जीवन बीमा निगम' (Life Insurance Corporation of India – LIC) को निजी क्षेत्र के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से औपचारिक मंजूरी मिल गई है। एचडीएफसी बैंक द्वारा स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने एलआईसी को बैंक की कुल चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Share Capital) या वोटिंग राइट्स का 9.99% तक अधिग्रहण करने की अनुमति प्रदान की है।

वर्तमान में HDFC Bank में कितनी है LIC की हिस्सेदारी?

नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, 14 अगस्त तक की स्थिति के मुताबिक एचडीएफसी बैंक में एलआईसी की शेयरधारिता 4.11% थी। इससे पहले एलआईसी ने बैंक में बड़ी हिस्सेदारी (Major Shareholding) हासिल करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष आवेदन किया था। केंद्रीय बैंक की इस हालिया मंजूरी के बाद अब एलआईसी ओपन मार्केट या अन्य माध्यमों से बैंक में अपनी कुल हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 10% (9.99%) के स्तर तक ले जा सकेगी।

बैंकिंग रेगुलेशन और आरबीआई के कड़े दिशानिर्देशों का पालन जरूरी

आरबीआई द्वारा दी गई यह मंजूरी शर्तों के अधीन है। इसके तहत एलआईसी को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (Banking Regulation Act, 1949), वाणिज्यिक बैंकों में शेयरों के अधिग्रहण और होल्डिंग से जुड़े मास्टर डायरेक्शंस, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और सेबी (SEBI) के सभी संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी समय बैंक में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी 9.99% की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।

शेयर बाजार और HDFC Bank के निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

एचडीएफसी बैंक और मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के ऐतिहासिक विलय के बाद से ही बैंक के शेयरों में उतार-चढ़ाव और मार्जिन दबाव देखने को मिला है। ऐसे समय में देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशक एलआईसी द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाने की खबर बाजार के लिए काफी सकारात्मक मानी जा रही है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि एलआईसी जैसी दिग्गज घरेलू संस्था का यह कदम बैंक के फंडामेंटल्स, भविष्य की ग्रोथ और लॉन्ग-टर्म स्थिरता पर मजबूत भरोसे को दर्शाता है। इससे रिटेल निवेशकों और संस्थागत फंड्स का बैंक पर भरोसा और मजबूत होगा।

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