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Hyderabad House History : बटरफ्लाई जैसा डिजाइन और राजाओं वाली शान दिल्ली के दिल में बसी इस इमारत का राज क्या है?

News India Live, Digital Desk : अगर आप टीवी न्यूज़ देखते हैं, तो आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी कोई विदेशी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति (जैसे व्लादिमीर पुतिन या जो बाइडन) भारत आते हैं, तो पीएम मोदी उनसे ‘हैदराबाद हाउस’ (Hyderabad House) में मिलते हैं। वहां लंच होता है, फोटो खिंचती हैं और बड़े-बड़े समझौते साइन होते हैं।क्या आपने कभी सोचा है कि इसका नाम ‘हैदराबाद हाउस’ क्यों है, जबकि यह दिल्ली में इंडिया गेट के पास स्थित है? और इसे बनवाने वाला वो कौन शख्स था जिसके पास इतना पैसा था कि उसने दिल्ली के सबसे महंगे इलाके में अपना ‘निजी महल’ खड़ा कर दिया?चलिए, आज आपको इतिहास के पन्नों से निकालकर एक बहुत ही रोचक कहानी बताते हैं।दुनिया के सबसे अमीर आदमी का ‘गेस्ट हाउस’इस आलीशान इमारत को बनवाया था हैदराबाद के आखिरी निज़ाम, मीर उस्मान अली खान (Mir Osman Ali Khan) ने।दोस्तों, ये कोई आम राजा नहीं थे। एक समय था जब टाइम मैगज़ीन ने इन्हें दुनिया का सबसे अमीर आदमी (Richest Man in the World) घोषित किया था। कहा जाता है कि उनके पास इतना सोना और हीरे थे कि वे ‘जैकब डायमंड’ (185 कैरेट का हीरा) को सिर्फ पेपरवेट (कागज दबाने) के लिए इस्तेमाल करते थे!दिल्ली में क्यों बनवाया घर?जब अंग्रेजों ने 1911 में भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट की, तो उन्होंने देश भर के राजा-महाराजाओं से कहा कि वे दिल्ली में अपने रहने के लिए घर बनवा लें। लुटियंस दिल्ली (Lutyens’ Delhi) बसाई जा रही थी।निज़ाम उस्मान अली खान को लगा कि जब वे वायसराय से मिलने दिल्ली आएं, तो किसी होटल या छोटे घर में क्यों रहें? उनकी शान में यह गुस्ताखी होगी। इसलिए उन्होंने अपनी रईसी दिखाने के लिए 1926 में इस महल को बनवाना शुरू किया और 1928 में यह बनकर तैयार हुआ।तितली जैसा डिज़ाइन (Butterfly Shape)इस इमारत की खासियत इसका आर्किटेक्चर है। इसे मशहूर अंग्रेज आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस (Edwin Lutyens) ने ही डिजाइन किया था।इसका नक्शा एक तितली (Butterfly) के आकार का है।यह 8 एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैला है।इसमें मुग़ल और यूरोपीय वास्तुकला का ऐसा संगम है जो देखते ही बनता है। इसका गुंबद (Dome) इसे शाही लुक देता है।कहा जाता है कि निज़ाम इसे देखकर इतने खुश हुए थे कि उन्होंने अपने बेटों से कहा था, “यह महल हमारी शान का प्रतीक रहेगा।”अब यह सरकार के पास कैसे आया?आजादी के बाद, जब रियासतों का भारत में विलय हुआ, तो हैदराबाद हाउस भी भारत सरकार के अधीन आ गया। अब इसका इस्तेमाल भारत सरकार का विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) करता है।यह जगह सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं है, बल्कि भारत की ‘मेहमाननवाजी’ का सबसे बड़ा केंद्र है। आज भी जब आप टीवी पर इसकी भव्य सीढ़ियां और झूमर देखते हैं, तो याद रखिएगा कि यह उस निज़ाम की देन है जो कभी दुनिया की दौलत मुट्ठी में रखता था।

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