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Income Tax Case Win: ₹1.33 करोड़ कैश जमा और ITR न भरने के बाद भी आयकर विभाग से जंग जीत गए मैसूर के रिटायर्ड शिक्षक

यदि कोई सामान्य नागरिक अपने बैंक खाते में 1.33 करोड़ रुपये जैसी भारी-भरकम रकम नकद जमा कर दे और उसके बाद इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भी दाखिल न करे, तो यह मान लिया जाता है कि आयकर विभाग का शिकंजा कसना तय है। लेकिन कर्नाटक के मैसूर से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। एक रिटायर्ड शिक्षक ने न तो ITR भरा और न ही करोड़ों का हिसाब दे पाए, फिर भी बेंगलुरु आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग की पूरी कार्रवाई को ही रद्द कर दिया। आइए जानते हैं कि इस दिलचस्प मामले में आखिर ऐसा क्या हुआ कि बाजी पूरी तरह से पलट गई।

क्या था पूरा मामला और कैसे रडार पर आए रिटायर्ड शिक्षक

मैसूर के रहने वाले मारथिक्यथानहल्ली एक रिटायर्ड शिक्षक हैं। उन्होंने आकलन वर्ष (AY) 2015-16 के दौरान अपने बैंक खाते में करीब 1.33 करोड़ रुपये नकद जमा किए थे। खास बात यह थी कि उन्होंने उस वित्तीय वर्ष के लिए कोई ITR फाइल नहीं किया था। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) ने इस संदिग्ध और भारी-भरकम लेनदेन को पकड़ लिया और आयकर विभाग को अलर्ट भेज दिया। विभाग के पास रिकॉर्ड था कि उनकी मुख्य आय खेती और बैंक ब्याज से है, लेकिन अचानक करोड़ों रुपये के कैश ट्रांजैक्शन से विभाग को शक हुआ कि यह कोई अघोषित आय (Black Money) है। इसके बाद विभाग ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी।

आयकर विभाग की नोटिसबाजी और असेसमेंट की कार्रवाई

जांच को आगे बढ़ाते हुए आयकर विभाग ने 26 मार्च 2022 को शिक्षक को धारा 148A(b) के तहत पहला नोटिस थमाया। शिक्षक की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर, आकलन अधिकारी (AO) ने 26 अप्रैल 2022 को धारा 148A(d) के तहत आदेश जारी कर दिया और साथ ही धारा 148 का नोटिस भेजकर ITR भरने को कहा। शिक्षक ने बाद में ITR भरा भी, लेकिन उसका ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया, जिसके कारण उसे अमान्य मान लिया गया। इसके बाद विभाग ने पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) प्रक्रिया के तहत उनकी कुल आय 48.85 लाख रुपये तय कर दी और लगभग 48.73 लाख रुपये को अघोषित आय मानते हुए उस पर टैक्स लगा दिया। CIT(A) से राहत न मिलने पर यह मामला अंततः ITAT बेंगलुरु की बेंच के पास पहुंच गया।

26 दिन की देरी ने बदल दिया पूरे केस का रुख

ITAT बेंगलुरु में सुनवाई के दौरान शिक्षक के वकीलों ने एक बहुत बड़ा कानूनी दांव खेला। उन्होंने दलील दी कि आयकर विभाग ने धारा 148 का मुख्य नोटिस तय वैधानिक समय-सीमा (Limitation Period) खत्म होने के पूरे 26 दिन बाद जारी किया था। पुराने नियमों के मुताबिक AY 2015-16 के लिए नोटिस भेजने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2022 थी। कुछ प्रशासनिक छूटों को भी जोड़ लिया जाए तो अधिकतम 12 अप्रैल 2022 तक ही नोटिस जारी किया जा सकता था, जबकि विभाग ने इसे 26 अप्रैल 2022 को भेजा। ITAT ने इस दलील को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया और स्पष्ट किया कि जब कानूनी समय-सीमा के बाद नोटिस ही अवैध रूप से भेजा गया है, तो उसके बाद की सारी असेसमेंट कार्रवाई अपने आप निरस्त मानी जाएगी। ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए करदाता को बड़ी राहत दे दी।

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