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Industry Bitter Truth : उम्र ढलते ही बदल जाता है व्यवहार 50 साल की उपासना सिंह का छलका दर्द

News India Live, Digital Desk: लगभग तीन दशकों से दर्शकों को हंसाने वाली उपासना सिंह आज बेहद भावुक नजर आईं। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के उस ‘छिपे हुए सच’ को उजागर किया, जो अक्सर अभिनेत्रियों के 40 या 50 की उम्र पार करते ही उनके सामने आता है। उन्होंने बताया कि कैसे इंडस्ट्री में सीनियर कलाकारों के साथ होने वाला व्यवहार उन्हें अंदर तक आहत करता है।1. उपासना सिंह के खुलासे की 3 बड़ी बातें (Key Highlights)कैरेक्टर का टाइपकास्ट होना: उपासना ने कहा, “एक उम्र के बाद आपको केवल ‘मां’ या ‘चाची’ के घिसे-पिटे रोल ही ऑफर किए जाते हैं। कोई यह नहीं देखता कि आपके भीतर कितनी एक्टिंग बची है।”इज्जत में कमी: उन्होंने आरोप लगाया कि सेट पर जो सम्मान ‘लीड एक्टर्स’ को मिलता है, वह सीनियर सपोर्टिंग एक्टर्स को नहीं मिलता। कई बार वैनिटी वैन और सुविधाओं के मामले में भी भेदभाव होता है।बजट का बहाना: “जब पैसे की बात आती है, तो प्रोड्यूसर्स पुराने कलाकारों को कम पैसे देने के लिए ‘बजट की कमी’ का रोना रोते हैं, जबकि उन्हीं फिल्मों में नए चेहरों पर करोड़ों लुटाए जाते हैं।”2. कॉमेडी की दुनिया से ‘किनारा’ करने की वजहउपासना सिंह ने यह भी साफ किया कि वह अब केवल कॉमेडी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं:क्रिएटिव संतुष्टि: उन्होंने बताया कि ‘द कपिल शर्मा शो’ छोड़ने के बाद उन्होंने पंजाबी सिनेमा और वेब सीरीज की ओर रुख किया ताकि वे अपनी अभिनय क्षमता को चुनौती दे सकें।खुद की फिल्म: उपासना ने हाल ही में अपने बेटे निश्चय को लॉन्च करने के लिए खुद की फिल्म का निर्माण भी किया, क्योंकि उन्हें लगता है कि बाहर के लोग उनके परिवार के टैलेंट को सही मौका नहीं दे रहे थे।3. ओटीटी (OTT) ने दी है नई उम्मीदअपनी शिकायतों के बीच उपासना ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तारीफ भी की:प्लेटफॉर्मउपासना का नजरियाबॉलीवुड फिल्मेंउम्र और लुक को ज्यादा महत्व देते हैं।ओटीटी (OTT)यहाँ कहानियों पर जोर है। ‘पंचायत’ या ‘मिर्जापुर’ जैसे शोज ने साबित किया है कि उम्रदराज कलाकारों के लिए भी बेहतरीन लीड रोल्स हो सकते हैं।4. सोशल मीडिया पर रिएक्शनउपासना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस उनके समर्थन में उतर आए हैं। कई लोगों का कहना है कि उनकी टाइमिंग और एक्टिंग आज भी कई यंग एक्टर्स से बेहतर है।क्या वाकई बदल रहा है समय?उपासना सिंह का यह बयान नीना गुप्ता और शीबा चड्ढा जैसे कलाकारों की उस मुहिम को आगे बढ़ाता है, जहाँ वे ‘बुढ़ापे’ को केवल सफेद बालों तक सीमित नहीं रखना चाहते। 50 साल की उम्र में उपासना का यह दर्द इस बात का सबूत है कि बॉलीवुड को अभी भी अपनी सोच में सुधार करने की जरूरत है।

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