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IPO Boom: 23 में से 20 कंपनियों ने कराया तगड़ा मुनाफा, रिटेल निवेशकों की जबर्दस्त भागीदारी से प्राइमरी मार्केट में लौटी रौनक

भारतीय शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में एक बार फिर बंपर तेजी का दौर देखने को मिल रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और द्वितीयक बाजार (Secondary Market) में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद नए आईपीओ (Initial Public Offerings) पर दांव लगाने वाले निवेशकों को शानदार रिटर्न हासिल हुआ है। हालिया मार्केट एनालिटिक्स रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य मंच (Mainboard) पर सूचीबद्ध हुई 23 प्रमुख कंपनियों में से 20 कंपनियों ने अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले पॉजिटिव और मजबूत रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल किया है। प्राथमिक बाजार का यह शानदार स्ट्राइक रेट खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के अटूट भरोसे को और मजबूत कर रहा है।

रिटेल निवेशकों की रिकॉर्ड भागीदारी बनी नई ताकत

पारंपरिक रूप से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) पर निर्भर रहने वाला भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों की मजबूत पूंजी से संचालित हो रहा है।

  • मजबूत सब्सक्रिप्शन आंकड़े: लगभग प्रत्येक गुणवत्तापूर्ण आईपीओ में खुदरा कोटा (Retail Portion) कई गुना ओवरसब्सक्राइब हो रहा है।

  • मंथली एसआईपी और डीमैट विस्तार: देश भर में हर महीने ₹30,000 करोड़ से अधिक का एसआईपी इनफ्लो और रिकॉर्ड संख्या में खुल रहे नए डीमैट खातों ने लिक्विडिटी का मजबूत आधार तैयार किया है।

  • लिस्टिंग गेन पर फोकस: नए निवेशक केवल शॉर्ट-टर्म लिस्टिंग गेन ही नहीं, बल्कि फंडामेंटली मजबूत कंपनियों में दीर्घकालिक वेल्थ क्रिएशन के लिए भी आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

23 में से 20 कंपनियों ने क्यों कराया बंपर मुनाफा?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण कंपनियों द्वारा की जा रही 'रीजनेबल प्राइसिंग' (आकर्षक मूल्यांकन) और प्रॉफिट-आफ्टर-टैक्स (PAT) पॉजिटिव कंपनियों की बढ़ती संख्या है। पहले जहां अत्यधिक महंगे वैल्यूएशन पर अनप्रॉफिटेबल न्यू-एज टेक कंपनियां बाजार में उतरती थीं, वहीं अब मजबूत कैश फ्लो, स्पष्ट बिजनेस मॉडल और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस वाली पारंपरिक व आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, कंज्यूमर और ईपीसी कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है। यही कारण है कि लिस्टिंग के दिन और उसके बाद भी 85% से अधिक स्टॉक्स में निवेशकों की पूंजी सुरक्षित रहने के साथ बढ़ी है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही आईपीओ क्रांति

आईपीओ में निवेश का यह क्रेज केवल मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, बिहार के पटना, राजस्थान के जयपुर, मध्य प्रदेश के इंदौर और गुजरात के अहमदाबाद व सूरत जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा व खुदरा निवेशक डिजिटल ब्रोकिंग ऐप्स और यूपीआई (UPI Mandate) के जरिए बड़े पैमाने पर आईपीओ बिडिंग में हिस्सा ले रहे हैं। स्थानीय स्तर पर वित्तीय जागरूकता और हिंदी में उपलब्ध रिसर्च डेटा ने छोटे शहरों के निवेशकों को शेयर बाजार की मुख्यधारा से जोड़ा है।

आने वाले महीनों में कतार में हैं कई मेगा आईपीओ

प्राइमरी मार्केट की यह मजबूती आगामी तिमाहियों में और अधिक गति पकड़ने वाली है। सेबी (SEBI) की पाइपलाइन में 200 से अधिक कंपनियों के ड्राफ्ट पेपर्स तैयार हैं। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), जेप्टो (Zepto), एसबीआई म्यूचुअल फंड्स (SBI Mutual Fund) और अन्य दिग्गज यूनिकॉर्न्स भी अपने पब्लिक इश्यू लाने की तैयारी में हैं।

(डिस्क्लेमर: आईपीओ और शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी पब्लिक इश्यू में आवेदन करने से पहले कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) और वित्तीय सलाहकारों की राय अवश्य लें।)

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