उत्तर प्रदेश

UP Politics : मुजफ्फरनगर में योगी-जयंत की हुंकार, पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरणों को साधने की बड़ी तैयारी

News India Live, Digital Desk: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुजफ्फरनगर हमेशा से ही सत्ता का केंद्र रहा है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी ने एक साझा मंच से हुंकार भरकर विपक्ष के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बीजेपी और आरएलडी के इस ‘डबल इंजन’ गठबंधन ने मुजफ्फरनगर की रैली के जरिए जाट और किसान बेल्ट में अपनी पकड़ को और मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया है।जाट राजनीति और बीजेपी-आरएलडी का संगमपश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं की भूमिका निर्णायक होती है। पिछले कुछ चुनावों में किसान आंदोलन के चलते बीजेपी को इस क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन जयंत चौधरी के साथ आने से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। रैली के दौरान सीएम योगी ने चौधरी चरण सिंह के योगदान को याद करते हुए उन्हें ‘किसानों का मसीहा’ बताया और बीजेपी सरकार द्वारा उन्हें दिए गए ‘भारत रत्न’ का उल्लेख किया। विशेषज्ञों का मानना है कि जयंत का साथ मिलना बीजेपी के लिए ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का सबसे बड़ा दांव है।सीएम योगी का प्रहार: ‘दंगा मुक्त उत्तर प्रदेश’मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में मुजफ्फरनगर के पुराने दौर की याद दिलाते हुए पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले जो मुजफ्फरनगर दंगों की आग में झुलसता था, आज वह विकास और सुरक्षा का मॉडल बन गया है। सीएम ने कहा, “हमारी सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति को खत्म कर अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा किया है।” उन्होंने गन्ना किसानों के भुगतान और बिजली आपूर्ति में सुधार को भी अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।जयंत चौधरी का नया तेवर: ‘किसानों के सम्मान की जंग’साझा रैली में जयंत चौधरी का रुख काफी सकारात्मक नजर आया। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों और युवाओं के हित में यह गठबंधन समय की मांग है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूपी के बुनियादी ढांचे में जो बदलाव आए हैं, वह काबिले तारीफ हैं। जयंत ने स्पष्ट किया कि बीजेपी के साथ उनका गठबंधन केवल चुनावी नहीं, बल्कि विकास के साझा विजन पर आधारित है।विपक्ष की बढ़ी बेचैनीयोगी-जयंत की इस जुगलबंदी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। मुजफ्फरनगर की इस रैली का असर न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि बागपत, शामली, बिजनौर और मेरठ जैसे पड़ोसी जिलों के मतदान पैटर्न पर भी पड़ने की संभावना है। बीजेपी-आरएलडी की यह साझा ताकत मुस्लिम-जाट समीकरणों में सेंध लगाने और ‘किसान कार्ड’ के जरिए बड़ी जीत सुनिश्चित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

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