IT सेक्टर में भूकंप! Accenture की एक रिपोर्ट से क्यों कांप उठे TCS, Infosys और Wipro के निवेशक, जानिए क्या होने वाला है आगे

ग्लोबल आईटी और कंसल्टिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी एक्सेंचर (Accenture) के हालिया नतीजों और कमजोर भविष्य के अनुमानों ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के निवेशकों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक स्तर पर जब भी एक्सेंचर जैसी बड़ी कंपनी अपनी कमाई या भविष्य के रेवेन्यू को लेकर चिंता जताती है, तो उसका सीधा और गहरा असर घरेलू शेयर बाजार में लिस्टेड भारत की दिग्गज कंपनियों पर पड़ता है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro) और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों के शेयरों में कल से ही जो बिकवाली देखी जा रही है, उसने निवेशकों को सचेत कर दिया है कि आईटी सेक्टर में अभी भी सब कुछ ठीक नहीं है।
एक्सेंचर के कमजोर संकेतों का असली मतलब क्या है?
एक्सेंचर ने अपने वित्तीय वर्ष के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान (गाइडेंस) को उम्मीद से कम रखा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में कंपनियों ने अपने आईटी बजट और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करना काफी कम कर दिया है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियां अपनी कुल कमाई का लगभग 60 से 70 फीसदी हिस्सा अमेरिकी और यूरोपीय देशों से हासिल करती हैं, इसलिए वहां होने वाली किसी भी तरह की मंदी या कॉस्ट-कटिंग का सीधा असर हमारे घरेलू टेक दिग्गजों के ऑर्डर पाइपलाइन और मुनाफे पर पड़ता है।
टीसीएस और इंफोसिस के निवेशकों के लिए खतरे की घंटी?
बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति छोटे और शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। टीसीएस और इंफोसिस जैसे बड़े शेयरों में कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन या गिरावट का दौर लंबा खिंच सकता है। नई डील्स मिलने की रफ्तार धीमी होने के कारण अगले कुछ तिमाहियों के नतीजे भी उम्मीद से कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है। विप्रो, जो पहले से ही अपने आंतरिक बदलावों और मार्जिन के दबाव से जूझ रही है, उसके लिए यह स्थिति थोड़ी और गंभीर हो सकती है।
इस माहौल में निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की क्या है सलाह?
इस भारी उठापटक और बिकवाली के बीच लॉन्ग-टर्म यानी लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब भी बड़ी कंपनियों के शेयरों में ऐसा बड़ा करेक्शन आता है, तो वह वैल्यू बाइंग यानी सही कीमत पर अच्छे शेयर खरीदने का मौका होता है। भारतीय आईटी कंपनियों की बैलेंस शीट बेहद मजबूत है और उनके पास नकदी का अच्छा भंडार है। निवेशकों को इस समय एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय 'सिप' (SIP) या धीरे-धीरे हर गिरावट पर अच्छे शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने की रणनीति अपनानी चाहिए।