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ITR Filing 2026: क्या 80 साल की उम्र के बाद सच में नहीं भरना पड़ता इनकम टैक्स रिटर्न

 

भारत में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को लेकर अक्सर कई तरह के भ्रम देखने को मिलते हैं, खासकर जब बात देश के वरिष्ठ और अति-वरिष्ठ नागरिकों (Super Senior Citizens) की हो। सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चाओं में अक्सर यह दावा किया जाता है कि 80 साल की उम्र पार करने के बाद बुजुर्गों को आईटीआर (ITR) भरने की कोई जरूरत नहीं होती। टैक्सपेयर्स के बीच फैले इस बड़े असमंजस को दूर करना बेहद जरूरी है क्योंकि आधी-अधूरी जानकारी के कारण टैक्स विभाग से नोटिस आने का खतरा बना रहता है। आइए एक सीनियर रिपोर्टर की नजर से सीधे और आसान शब्दों में समझते हैं कि देश का आयकर कानून इस बारे में आखिर क्या कहता है।

अति-वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स छूट की असली सीमा क्या है

आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों को 'अति-वरिष्ठ नागरिक' की श्रेणी में रखा जाता है। यह सच है कि सरकार इन्हें टैक्स स्लैब में आम नागरिकों के मुकाबले काफी ज्यादा राहत देती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत जहां आम लोगों के लिए ढाई या तीन लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री होती है, वहीं 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों के लिए यह बेसिक छूट सीमा 5 लाख रुपये तय की गई है। वहीं नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत भी इन्हें तय नियमों के अनुसार टैक्स रिबेट का लाभ मिलता है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि 5 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई होने पर भी इन्हें रिटर्न फाइल करने से पूरी छूट मिल गई है।

धारा 194P की वो खास शर्त जो हर बुजुर्ग को जाननी जरूरी है

सरकार ने बजट के जरिए आयकर कानून में धारा 194P (Section 194P) को जोड़ा था, जिसे अक्सर लोग पूरी तरह समझने में गलती कर बैठते हैं। इस नियम के तहत 75 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को कुछ विशेष शर्तों पर आईटीआर दाखिल करने से छूट दी गई है। शर्त यह है कि बुजुर्ग व्यक्ति की आय का जरिया केवल और केवल 'पेंशन' और उसी बैंक खाते से मिलने वाला 'ब्याज' होना चाहिए। अगर आपका पेंशन खाता और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक ही बैंक में है, तो वह बैंक खुद आपकी आय की गणना करके नियमानुसार टैक्स काट लेता है और आपको अलग से आईटीआर भरने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर आपकी कमाई का कोई दूसरा जरिया है, तो यह नियम आप पर लागू नहीं होता।

इन परिस्थितियों में 80 साल के बाद भी आईटीआर भरना है अनिवार्य

अगर आप 80 वर्ष के हो चुके हैं और आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये की बेसिक छूट सीमा से अधिक है, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना पूरी तरह अनिवार्य है। इसके अलावा, यदि आपकी कोई किराये से होने वाली आमदनी (Rental Income), शेयरों या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन्स की कमाई, या फिर किसी बिजनेस से प्रॉफिट हो रहा है, तो आपको धारा 194P का लाभ नहीं मिलेगा। एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि भले ही आपकी आय टैक्स के दायरे में न आती हो, लेकिन अगर बैंक ने आपकी जमा राशि पर टीडीएस (TDS) काट लिया है, तो उस कटे हुए पैसे का रिफंड वापस पाने के लिए भी आपको अपना आईटीआर जरूर फाइल करना चाहिए। डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए फॉर्म-12बीबीए के जरिए प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया गया है।

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