Jana Nayagan Box Office Collection Day 2: थलपति विजय की ‘जना नायकन’ ने 2 दिनों में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा, जानें दूसरे दिन का कलेक्शन

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की बहुप्रतीक्षित और सिनेमाई करियर की आखिरी फिल्म 'जना नायकन' (Jana Nayagan) आखिरकार भारी विवादों और सर्टिफिकेशन की अड़चनों के बाद सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर इसका मुकाबला 'द ओडिसी', 'धमाल 4' और 'इविल डेड बर्न' जैसी बड़ी फिल्मों से देखने को मिल रहा है।
जहां पहले दिन फिल्म ने ₹41.6 करोड़ का धमाकेदार ओपनिंग कलेक्शन किया था, वहीं दूसरे दिन (शुक्रवार) इसकी कमाई में लगभग 50% की गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन भारत में लगभग ₹21.15 करोड़ का नेट कलेक्शन किया है।
2 दिनों में 50 करोड़ पार, 100 करोड़ क्लब पर नजर
दूसरे दिन की कमाई को मिलाकर 'जना नायकन' ने महज 2 दिनों के भीतर भारत में ₹63.85 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर लिया है।
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पहला दिन (Day 1): ₹42.70 करोड़
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दूसरा दिन (Day 2): ₹21.15 करोड़
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कुल भारत कलेक्शन (Net): ₹63.85 करोड़
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वर्ल्डवाइड ग्रॉस (Worldwide Gross): ओवरसीज मार्केट के शानदार रिस्पॉन्स के बदौलत फिल्म का दुनियाभर में कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹112.50 करोड़ पहुंच गया है।
₹300-350 करोड़ का बजट और वीकेंड से उम्मीदें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'जना नायकन' का अनुमानित बजट ₹300 से ₹350 करोड़ के आसपास है। शुक्रवार को वर्किंग डे होने की वजह से कलेक्शन में कमी देखी गई, लेकिन ट्रेड एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि शनिवार और रविवार के वीकेंड पर इसकी कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। अगर वीकेंड पर रफ्तार बनी रही तो यह फिल्म जल्द ही 200 करोड़ क्लब की ओर कदम बढ़ा सकती है।
थलपति विजय की आखिरी फिल्म
'जना नायकन' थलपति विजय की फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म है, क्योंकि वे अब पूरी तरह से राजनीति में कदम रख चुके हैं।
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निर्देशक व निर्माता: फिल्म का निर्देशन एच. विनोद (H. Vinoth) ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस (KVN Productions) के बैनर तले वेंकट के. नारायणन ने प्रोड्यूस किया है।
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स्टारकास्ट: फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज, प्रियमाणी और ममिता बैजू जैसे सितारे मुख्य भूमिकाओं में हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी एक पूर्व पुलिस अधिकारी (थलपति विजय) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दिवंगत दोस्त की बेटी का लालन-पालन करता है और उसे भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है। इस दौरान उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। इसके साथ ही फिल्म में समाज में फैली भ्रष्टाचार और राजनीतिक अव्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं पर भी कड़ा प्रहार किया गया है।