JET Exam 2026: 18 साल का इंतजार और परीक्षा में भारी बवाल रांची के केराली स्कूल में प्रश्नपत्र कम पड़े तो अभ्यर्थियों ने काटा हंगामा

News India Live, Digital Desk: झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024, जो लगभग 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रविवार (26 अप्रैल 2026) को आयोजित की गई, अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आई। राजधानी रांची के एचईसी (HEC) आवासीय परिसर स्थित केराली स्कूल परीक्षा केंद्र पर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब अभ्यर्थियों को पता चला कि वहां प्रश्नपत्रों की संख्या कम है। करीब 120 प्रश्नपत्रों की कमी के कारण सैकड़ों छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए, जिसके बाद केंद्र पर ‘कर्फ्यू’ जैसा माहौल बन गया।केराली स्कूल बना अखाड़ा: अभ्यर्थियों ने किया घेरावरांची के केराली स्कूल सेंटर पर कुल 600 से अधिक अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा शुरू होने के समय अधिकारियों को अहसास हुआ कि प्रश्नपत्रों का बंडल संख्या में कम है। देखते ही देखते खबर पूरे सेंटर पर फैल गई और गुस्साए अभ्यर्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप था कि आयोग की इस लापरवाही ने उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई छात्रों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे दूर-दराज के जिलों से ट्रेन और बस लेकर आए थे, लेकिन प्रशासन की नाकामी के कारण उनकी परीक्षा ही शुरू नहीं हो सकी।अनुपस्थित छात्रों के पेपर से चला काम, 1 घंटा देरी से शुरू हुई परीक्षास्थिति को बिगड़ते देख केंद्र व्यवस्थापकों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने आनन-फानन में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की। जो छात्र परीक्षा में अनुपस्थित (Absent) रहे थे, उनके प्रश्नपत्रों को उपस्थित छात्रों में बांटा गया। इस पूरी जद्दोजहद में परीक्षा अपने निर्धारित समय से करीब एक घंटा देरी से शुरू हुई। हालांकि, तब तक कई छात्र मानसिक रूप से इतने परेशान हो चुके थे कि उन्होंने परीक्षा हॉल के बाहर ही धरना देना शुरू कर दिया था।बोकारो में भी संकट: दो विषयों की परीक्षा रदअव्यवस्था का आलम केवल रांची तक सीमित नहीं रहा। बोकारो के एक प्रमुख केंद्र पर भी प्रश्नपत्रों की कमी और गलत सेंटर पर पेपर भेजे जाने के कारण भारी बवाल हुआ। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बोकारो में उड़िया और शिक्षा (Education) विषयों की परीक्षा को रद करने का फैसला लिया है। आयोग के मुताबिक, इन विषयों के प्रश्नपत्र पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंच सके थे, जिससे परीक्षा का आयोजन संभव नहीं हो पाया।18 साल बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था!बता दें कि राज्य में आखिरी बार झारखंड पात्रता परीक्षा वर्ष 2007-08 में हुई थी। इस बार 43 विषयों के लिए आयोजित इस परीक्षा में राज्यभर से करीब 1.75 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे थे। छात्रों ने सोशल मीडिया पर आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस परीक्षा के लिए उन्होंने 18 साल इंतजार किया, उसके आयोजन में इतनी बड़ी चूक प्रशासन की गंभीरता पर सवालिया निशान लगाती है।