Jhansi Link Expressway: बुंदेलखंड की बदलेगी तस्वीर! 106 किमी लंबे ग्रीनफील्ड झांसी लिंक एक्सप्रेसवे से दिल्ली का सफर 4 घंटे में होगा पूरा

उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क तेजी से आकार ले रहा है। इसी कड़ी में 'उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण' (यूपीडा) द्वारा बनाया जा रहा 106 किलोमीटर लंबा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल इलाके में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा, बल्कि पूरे बुंदेलखंड में उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए रास्ते खोलेगा।
4 प्रमुख एक्सप्रेसवे आपस में जुड़ेंगे: दिल्ली से झांसी महज 4 घंटे में
इस लिंक एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका शानदार कनेक्टिविटी नेटवर्क है। यह नया मार्ग उत्तर प्रदेश के चार बड़े एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ेगा:
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यमुना एक्सप्रेसवे
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
इस एकीकृत कनेक्टिविटी से दिल्ली और नोएडा से झांसी का सफर अब काफी सुगम और तेज हो जाएगा। पहले जो दूरी तय करने में घंटों लगते थे, अब यात्री यमुना, आगरा-लखनऊ और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से होते हुए महज 4 घंटे में दिल्ली से झांसी पहुंच सकेंगे।
दो चरणों में हो रहा है निर्माण: प्रति किमी ₹47 करोड़ की लागत
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को दो अलग-अलग चरणों में तेजी से तैयार किया जा रहा है। प्रति किलोमीटर लगभग ₹47 करोड़ की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की तीसरी सबसे महंगी सड़क परियोजना है।
| चरण (Phase) | रूट विस्तार | लंबाई | अनुमानित लागत |
| पहला चरण (Phase 1) | फूलपुरा (जालौन) से पिपरा गांव (झांसी) | लगभग 50 किमी | ₹2,262 करोड़ |
| दूसरा चरण (Phase 2) | पिपरा से झांसी शहर व इंडस्ट्रियल कॉरिडोर | लगभग 56 किमी | ₹2,739 करोड़ |
झांसी की 4 तहसीलों के 63 गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे झांसी जिले की चार प्रमुख तहसीलों—गरौठा, टहरौली, मोठ और सदर के कुल 63 गांवों से होकर गुजरेगा। एक्सप्रेसवे बनने से इन ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के दाम बढ़ेंगे और मुख्य शहर व औद्योगिक केंद्रों से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
बीडा और डिफेंस कॉरिडोर के लिए साबित होगा वरदान
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे केवल एक यातायात का साधन नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) और डिफेंस कॉरिडोर परियोजना के लिए एक मजबूत जीवन रेखा का काम करेगा।
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लॉजिस्टिक्स हब: फूलपुरा जंक्शन और पिपरा जैसे प्रमुख बिंदुओं पर बड़े-बड़े वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे।
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रोजगार के अवसर: स्थानीय युवाओं के लिए लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों मौके पैदा होंगे।