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JPSC और JSSC छात्रों का आर-पार: 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर विधानसभा मार्च तक, इन 16 दिनों में क्या-क्या हुआ

झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक का गवाह बन रही है, जहां जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। पिछले 16 दिनों के भीतर राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में जिस तरह की उथल-पुथल मची है, उसने सरकार की नींद उड़ा दी है। 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग से शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक विशाल जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें छात्रों का गुस्सा परीक्षा हॉल से निकलकर सीधे झारखंड विधानसभा के घेराव और ऐतिहासिक मार्च तक पहुंच गया है।

16 दिनों का महा-आंदोलन और परीक्षाओं में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ छात्रों का सब्र का बांध आखिरकार टूट ही गया। इन 16 दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो शुरुआत में छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का रास्ता चुना था, लेकिन जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला, तो आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ बार-बार हो रहे खिलवाड़ को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।

विधानसभा मार्च और प्रशासनिक घेराबंदी के बीच गहराता सियासी संकट

आंदोलन के चरम पर पहुंचते ही छात्रों ने राजधानी रांची में विधानसभा की तरफ एक विशाल मार्च निकाला, जिसे रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी। सड़कों पर उमड़ी छात्रों की भारी भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच हुई तनातनी ने इस पूरे प्रकरण को राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में ला दिया है। विपक्ष लगातार हेमंत सोरेन सरकार को इस मुद्दे पर घेर रहा है और युवाओं की जायज मांगों को तुरंत मानने का दबाव बना रहा है। अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस बढ़ते जन-आक्रोश से निपटने के लिए क्या बड़ा और निर्णायक कदम उठाती है।

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