धर्म

Kamika Ekadashi 2026: द्विपुष्कर योग में रखा जाएगा कामिका एकादशी का व्रत! जानें सही तिथि, विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। सावन का पूरा महीना जहाँ भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है, वहीं सावन के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को 'कामिका एकादशी' (Kamika Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु (श्री हरि) के उपेंद्र स्वरूप की विधिवत पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत रखने से साधक को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन के समस्त पापों तथा दुखों से मुक्ति मिलती है।

इस वर्ष सावन की पहली एकादशी अत्यंत दुर्लभ और शुभ 'द्विपुष्कर योग' में पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि द्विपुष्कर योग में किए गए किसी भी धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ या दान-पुण्य का फल दोगुना होकर प्राप्त होता है।

कामिका एकादशी 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांगीय गणना के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 8 अगस्त 2026 की दोपहर 02:45 बजे से हो रही है, जिसका समापन 9 अगस्त 2026 की शाम 05:12 बजे होगा। उदया तिथि की सर्वमान्य परंपरा के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को ही रखा जाएगा।

पूजा के शुभ मुहूर्त:

  • सुबह की पूजा का मुहूर्त: 9 अगस्त को सुबह 05:47 बजे से लेकर सुबह 10:46 बजे तक का समय भगवान विष्णु की पूजा के लिए अति उत्तम रहेगा।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक।

  • द्विपुष्कर योग: 9 अगस्त को दोपहर 01:22 बजे से शुरू होकर शाम 05:12 बजे तक रहेगा। इस दौरान की गई विष्णु पूजा अत्यंत फलदायी साबित होगी।

कामिका एकादशी व्रत पारण (Parana) का समय

एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि-विधान के साथ सही समय पर किया जाए।

  • कामिका एकादशी व्रत पारण की तिथि: 10 अगस्त 2026, सोमवार

  • पारण का शुभ समय: 10 अगस्त की सुबह 05:48 बजे से लेकर सुबह 08:27 बजे तक

  • विशेष नियम: द्वादशी तिथि के भीतर ही पारण करना अनिवार्य होता है। पारण के दिन सुबह स्नान करके ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें, उसके बाद ही स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें।

भगवान विष्णु की पूजा विधि और तुलसी पत्र का महत्व

  1. संकल्प व स्नान: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी में या घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा सामग्री: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात रोली, गोपी चंदन, पीले फूल, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें।

  3. तुलसी पत्र अनिवार्य: भगवान श्री हरि विष्णु को भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु अपना भोग स्वीकार नहीं करते। कामिका एकादशी के दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है।

  4. मंत्र और कथा: पूजा के समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करें और कामिका एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। अंत में विष्णु जी और माता लक्ष्मी की आरती उतारें।

 

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