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Kerala Election 2026: क्या बदलेगा दशकों पुराना इतिहास? LDF, UDF और BJP के बीच त्रिकोणीय मुकाबले का विश्लेषण

News India Live, Digital Desk: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की घड़ी बेहद करीब आ गई है। राज्य की सभी 140 सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। केरल की राजनीति पारंपरिक रूप से दो ध्रुवों एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच घूमती रही है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ‘मिशन 100’ और ईसाई समुदायों के बदलते रुख ने मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। अन्य राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार का चुनाव केरल के इतिहास में एक बड़ा ‘पावर शिफ्ट’ ला सकता है।केरल चुनाव 2026: मुख्य कार्यक्रमनिर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है:मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026नतीजों की घोषणा: 4 मई 2026कुल सीटें: 140 (बहुमत के लिए 71 जरूरी)प्रमुख दलों का विश्लेषण और रणनीति1. एलडीएफ (LDF): क्या पिनाराई विजयन रचेंगे हैट्रिक?सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहा है।ताकत: सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए सुधार।चुनौती: ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-incumbency) और सोने की तस्करी (Gold Smuggling) जैसे पुराने विवादों का विपक्ष द्वारा फिर से उछाला जाना। साथ ही, मुस्लिम और ईसाई मतदाताओं के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।2. यूडीएफ (UDF): कांग्रेस की वापसी की छटपटाहटकांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) इस बार ‘अब नहीं तो कब’ की स्थिति में है।रणनीति: यूडीएफ इस बार भ्रष्टाचार और कथित प्रशासनिक विफलता को मुख्य मुद्दा बना रहा है। वीडी सतीसन और के. सुधाकरन जैसे नेता जमीन पर सक्रिय हैं।वोट बैंक: यूडीएफ का पारंपरिक आधार मुस्लिम और ईसाई समुदाय रहा है, लेकिन ईसाई वोट बैंक में सेंधमारी कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।3. भाजपा (BJP) और एनडीए: ‘मिशन 100’ और किंगमेकर की भूमिकाइस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा भाजपा की बढ़ती सक्रियता की है।नया गेम प्लान: भाजपा ने इस बार 100 सीटों पर आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है। पार्टी का लक्ष्य अपना वोट शेयर 30% तक ले जाना है।ईसाई आउटरीच: भाजपा पहली बार केरल में ईसाई समुदाय को साधने में सफल होती दिख रही है। ‘चर्च’ और भाजपा के बीच बढ़ती नजदीकी ने यूडीएफ के माथे पर बल ला दिए हैं।मुद्दे: सबरीमाला मुद्दा, विकास का ‘मोदी मॉडल’ और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।निर्णायक कारक: हिंदू और ईसाई वोट बैंककेरल की राजनीति में जातीय और धार्मिक समीकरण हमेशा से हावी रहे हैं:ईसाई वोट: मध्य केरल के जिलों (जैसे कोट्टायम, इडुक्की) में ईसाई मतदाता निर्णायक हैं। यदि इनका एक हिस्सा भी भाजपा की ओर झुकता है, तो यह यूडीएफ के लिए बड़ा नुकसान और भाजपा के लिए ऐतिहासिक बढ़त होगी।हिंदू ओबीसी: भाजपा लगातार हिंदू ओबीसी समुदायों (जैसे ईझावा) के बीच अपनी पैठ मजबूत कर रही है, जो पारंपरिक रूप से एलडीएफ का आधार रहे हैं।

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