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Khesari Lal Yadav: पिता के दिए ₹11 हजार से पहली एल्बम हुई फ्लॉप, फिर एक गाने ने रातों-रात बदल दी किस्मत

भोजपुरी सिनेमा के चमकते सितारे और लाखों दिलों की धड़कन खेसारी लाल यादव आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचना हर कलाकार का सपना होता है। आज उनके पास शोहरत है, दौलत है और करोड़ों फैंस का प्यार है। लेकिन इस आलीशान कामयाबी के पीछे एक लंबा, दर्दनाक और प्रेरणादायक संघर्ष छिपा है। हाल ही में एक लेटेस्ट पॉडकास्ट इंटरव्यू में खेसारी लाल यादव ने अपने अतीत के पन्नों को पलटा और अपनी गरीबी से लेकर भोजपुरी इंडस्ट्री की मशहूर अदाकारा काजल राघवानी के साथ अपने रिश्ते पर ऐसी बातें कहीं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। काजल राघवानी संग रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी: 'बेबी-सोना' और ब्रेकअप का कड़वा सच खेसारी लाल यादव का नाम लंबे समय तक भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी के साथ जोड़ा जाता रहा है। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री जितनी सुपरहिट थी, ऑफ-स्क्रीन उनके अफेयर के चर्चे भी उतने ही गर्म थे। इस पॉडकास्ट में जब उनसे काजल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना झिझक के अपनी बात रखी। खेसारी ने कहा कि जब वह काजल के साथ थे, तब वह उनके लिए बिल्कुल सही थीं और आज भी वह उनके लिए सही हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने आज के दौर के रिश्तों पर एक तीखा तंज भी कसा। खेसारी लाल यादव के शब्दों में: "अक्सर लोगों को प्यार हो जाता है, लेकिन बाद में वह मर्द की आदत बन जाती है। जब तक रिश्ता अच्छा चलता है, लोग एक-दूसरे को 'बेबी-सोना' कहते नहीं थकते। लेकिन जैसे ही ब्रेकअप होता है, वे एक-दूसरे की कमियां निकालने और बुराई करने पर उतर आते हैं। यह तरीका पूरी तरह से गलत है।" साइकिल से दूध बेचने से लेकर सुपरस्टार बनने तक का सफर खेसारी लाल यादव ने बताया कि उनका परिवार एक समय इतना गरीब था कि उनके पास खुद की एक कट्टा जमीन तक नहीं थी। पिता दिल्ली में मजदूरी करते थे और खेसारी गांव में अपने चाचा के साथ रहते थे। अपने इस लंबे संघर्ष के सफर को उन्होंने कुछ मुख्य पड़ावों में साझा किया है: समय / वर्ष जीवन का पड़ाव और संघर्ष (Struggle Phase) वास्तविक स्थिति बचपन के दिन साइकिल से घर-घर जाकर दूध बेचना इसी दौरान उन्हें गाने का शौक लगा और वे गाते रहते थे। साल 2004 – 2007 दिल्ली के ओखला में लिट्टी-चोखा की दुकान दिनभर सड़क किनारे लिट्टी-चोखा बेचते थे और रात में गाने का रियाज करते थे। साल 2006 शादी और पहली एल्बम की शुरुआत पिता ने जैसे-तैसे ₹11,000 दिए, जिससे पहली कैसेट निकाली पर वह फ्लॉप हो गई। साल 2008 बेटी 'कृति' का जन्म और पहला सुपरहिट गाना बेटी के आते ही किस्मत बदली और 'चूसता देवरा' गाना रातों-रात ब्लॉकबस्टर हो गया। एक गाने ने रातों-रात बदली किस्मत, बेटी को मानते हैं 'लकी चार्म' खेसारी लाल यादव के जीवन में सबसे बड़ा यू-टर्न साल 2008 में आया। इसी साल उनके घर बेटी 'कृति' ने जन्म लिया, जिसे अभिनेता आज भी अपना लकी चार्म मानते हैं। ठीक उसी समय उनका एक गाना रिलीज हुआ था जिसका नाम था— 'चूसता देवरा'। इस गाने की सबसे खास बात यह थी कि बजट की कमी के कारण खेसारी लाल यादव ने खुद लड़की के कपड़े पहने थे और साड़ी पहनकर ही उन्होंने जबरदस्त डांस भी किया था। यह प्रयोग जनता को इतना पसंद आया कि गाना रातों-रात पूरे देश में गूंज उठा। इस एक गाने ने खेसारी को फर्श से उठाकर सीधे अर्श पर बैठा दिया और उनकी गरीबी हमेशा के लिए खत्म हो गई। दिलचस्प बात यह है कि उनकी वही बेटी कृति आज बड़ी हो चुकी है और अब फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम भी करती है। खेसारी लाल यादव की यह कहानी सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी खराब क्यों न हों, अगर आपके भीतर हुनर है और आप बिना थके मेहनत करने को तैयार हैं, तो किस्मत को भी एक दिन आपका साथ देना ही पड़ता है।

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