Kiradu Temple : शाम ढलते ही यहाँ पत्थर बन जाते हैं इंसान राजस्थान के इस रहस्यमयी मंदिर का खौफ,जहाँ जाने से डरते हैं लोग

News India Live, Digital Desk: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित ‘किराडू मंदिर’ अपनी खूबसूरती से ज्यादा अपने खौफनाक श्राप के लिए मशहूर है। 11वीं शताब्दी में बने इन मंदिरों की नक्काशी देखकर हर कोई दंग रह जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच एक ऐसी बात घर कर गई है कि सूरज डूबने के बाद यहाँ कोई भी रुकने की हिम्मत नहीं करता। माना जाता है कि जो भी शाम के बाद यहाँ रुकता है, वह हमेशा के लिए पत्थर बन जाता है।साधु का श्राप: क्यों पत्थर बन गए लोग?इस रहस्य के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि सदियों पहले एक महान सिद्ध साधु अपने शिष्यों के साथ यहाँ आए थे। जब साधु भ्रमण पर गए, तो पीछे से उनके शिष्यों की तबीयत खराब हो गई। गाँव के केवल एक कुम्हारिन को छोड़कर किसी ने भी उन शिष्यों की मदद नहीं की।जब साधु लौटे और उन्हें यह पता चला, तो वे क्रोधित हो गए। उन्होंने पूरे गाँव को श्राप दिया कि “जहाँ के लोगों के दिल पत्थर के हैं, वे इंसान बनकर रहने के लायक नहीं, सब पत्थर बन जाएं।” साधु ने उस दयालु कुम्हारिन को वहाँ से चले जाने को कहा और चेतावनी दी कि पीछे मुड़कर मत देखना। लेकिन जिज्ञासावश उसने पीछे मुड़कर देख लिया और वह भी उसी वक्त पत्थर की मूर्ति बन गई। गाँव से कुछ दूर आज भी उस कुम्हारिन की पत्थर की प्रतिमा दिखाई देती है।वास्तुकला का बेजोड़ नमूना: राजस्थान का खजुराहोरहस्यों को अलग रख दें, तो किराडू के मंदिर स्थापत्य कला के मामले में बेमिसाल हैं। यहाँ मूल रूप से 5 मंदिरों का समूह है:सोमेश्वर मंदिर: यह सबसे बड़ा और मुख्य मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है।शिल्प कला: मंदिर की दीवारों पर बनी देवी-देवताओं, जानवरों और पौराणिक कथाओं की नक्काशी मध्य प्रदेश के खजुराहो की याद दिलाती है।शैली: यह मंदिर ‘सोमपुरा’ शैली (गुर्जर-प्रतिहार शैली) में बना हुआ है।क्या कहता है पुरातत्व विभाग (ASI)?हालाँकि विज्ञान ‘पत्थर बनने’ की घटना को नहीं मानता, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी सुरक्षा कारणों और इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए सूर्यास्त के बाद यहाँ प्रवेश वर्जित कर रखा है। मंदिर के आसपास के वीराने और टूटी-फूटी मूर्तियों को देखकर एक अजीब सी शांति और सिहरन महसूस होती है।कैसे पहुँचें किराडू?किराडू मंदिर बाड़मेर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर हाथमा गाँव के पास स्थित है।हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर (करीब 250 किमी) है।रेल मार्ग: बाड़मेर रेलवे स्टेशन मुख्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।