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Loni Pollution: दिल्ली नहीं, गाजियाबाद का ‘लोनी’ बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर! WHO मानक से 22 गुना ज्यादा जहरीली हुई हवा

नई दिल्ली/गाजियाबाद: प्रदूषण के मोर्चे पर भारत के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी IQAir द्वारा मंगलवार को जारी ‘वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025’ में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित लोनी (Loni) को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लोनी में प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक हो चुका है कि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा से 22 गुना अधिक है।लोनी की हवा में ‘जहर’: 23% की भारी बढ़ोतरी143 देशों के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में लोनी का सालाना औसत PM2.5 स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है। यह 2024 के मुकाबले लगभग 23% की वृद्धि को दर्शाता है। PM2.5 वे सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के जरिए फेफड़ों की गहराई तक उतरकर खून में घुल जाते हैं, जिससे स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।टॉप 10 में 5 भारतीय शहर: नई दिल्ली अब भी ‘प्रदूषित राजधानी’दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में भारत का दबदबा बरकरार है। टॉप 10 शहरों में भारत के 5 शहर शामिल हैं:लोनी (भारत): 112.5होतान (चीन): 109.6ब्यर्निहाट (मेघालय, भारत): 101.1नई दिल्ली (भारत): 99.6 (लगातार 7वीं बार सबसे प्रदूषित राजधानी)गाजियाबाद (भारत): सातवें स्थान परदेशों की रैंकिंग में पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश रहा, जबकि भारत छठे स्थान पर बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के केवल 14% शहर ही WHO के कड़े मानकों को पूरा कर पाए हैं।आखिर लोनी में क्यों बढ़ा इतना प्रदूषण?विशेषज्ञों ने लोनी में प्रदूषण बढ़ने के पीछे भौगोलिक और स्थानीय कारकों के घातक मेल को जिम्मेदार ठहराया है:धूल भरी आंधी और पराली: अप्रैल में आई धूल भरी आंधी और सर्दियों में आस-पास के क्षेत्रों में पराली जलाने से हवा की गुणवत्ता बिगड़ी।औद्योगिक इकाईयां: लोनी में मौजूद ईंट भट्टे (Brick Kilns) और छोटी फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं स्थानीय स्तर पर जहर घोल रहा है।थर्मल इन्वर्जन: सर्दियों में हवा की गति कम होने और तापमान गिरने से प्रदूषक जमीन के करीब ही फंसे रह जाते हैं, जिससे ‘स्मॉग’ की मोटी चादर बन जाती है।निर्माण और ट्रैफिक: दिल्ली-NCR का हिस्सा होने के कारण यहाँ भारी वाहनों का आवागमन और लगातार चल रहे निर्माण कार्य धूल का मुख्य स्रोत हैं।स्वास्थ्य पर सीधा हमला: कम हो रही है उम्रडॉक्टरों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ करार दिया है। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से न केवल बच्चों के फेफड़ों का विकास रुक रहा है, बल्कि बुजुर्गों में सोचने-समझने की क्षमता (Cognitive function) भी कमजोर हो रही है। वायु प्रदूषण अब दुनिया भर में समय से पहले होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण बन चुका है।सख्त कार्रवाई की जरूरत: एक्सपर्ट्स की मांगपर्यावरणविदों का कहना है कि भारत के ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (NCAP) को और अधिक गति देने की जरूरत है। प्रदूषण कम करने के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:सख्त एमिशन नॉर्म्स: फैक्ट्रियों और वाहनों के लिए उत्सर्जन नियमों का कड़ाई से पालन।क्लीन एनर्जी: ईंट भट्टों और उद्योगों को स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट करना।सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट: कचरा और पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध और उनके विकल्पों को बढ़ावा देना।मॉनिटरिंग नेटवर्क: ग्रामीण और उपनगरीय इलाकों में एयर क्वालिटी स्टेशनों की संख्या बढ़ाना।

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