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India Crude Oil : PNGRB सचिव ने बताया भारत के पास कितना है कच्चा तेल, क्या आएगी किल्लत?

News India Live, Digital Desk: नई दिल्ली में आयोजित PHDCCI हाइड्रोकार्बन समिट 2026 के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल भंडार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक तनाव के बावजूद देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन तेल के विशाल भंडार को लेकर कुछ सीमाएं भी हैं।20 से 40 दिन का ही बैकअप क्यों?सचिव अंजन कुमार मिश्रा के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में लिक्विड फ्यूल (कच्चा तेल) का इतना भंडार है जो 20 से 40 दिनों की मांग को पूरा कर सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी भी देश के लिए 6 महीने या उससे अधिक समय का बैकअप स्टॉक बनाना और उसे मेंटेन करना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है। हालांकि, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर यह बैकअप लगभग 74 दिनों तक का सुरक्षा कवच प्रदान करता है।पश्चिम एशिया संकट और भारत पर असरमध्य पूर्व (West Asia) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का जिक्र करते हुए सचिव ने स्वीकार किया कि यह स्थिति भारत को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा, “मैं झूठ नहीं बोलूंगा कि इसका भारत पर असर नहीं पड़ रहा है, लेकिन सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और हर परिस्थिति से निपटने के लिए योजनाएं तैयार हैं।” उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि देश में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) की कोई किल्लत नहीं है और पैनिक होने की जरूरत नहीं है।आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीतिईंधन के मोर्चे पर आत्मनिर्भरता और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है:स्रोतों का विविधीकरण: भारत अब केवल पश्चिम एशिया पर निर्भर नहीं है। रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल आयात बढ़ाया गया है। इसके अलावा मोजाम्बिक और अंगोला जैसे नए विकल्पों की तलाश जारी है।घरेलू उत्पादन: घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए नए अन्वेषण (Exploration) दौर शुरू किए गए हैं, हालांकि यह एक लंबी प्रक्रिया है।पड़ोसी देशों की मदद: संकट के इस दौर में भारत ने केवल अपनी जरूरतों का ध्यान नहीं रखा, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को भी ईंधन आपूर्ति में सहयोग दिया है।क्या बढ़ेंगी तेल की कीमतें?कीमतों में उछाल की आशंका पर उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक परिस्थितियों के कारण दाम बढ़ते भी हैं, तो यह प्रभाव अस्थायी (Temporary) होगा। सरकार के पास स्थिति को संभालने के पर्याप्त तंत्र मौजूद हैं और उम्मीद है कि कीमतें जल्द ही संकट-पूर्व स्तर पर लौट आएंगी।

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