Maharashtra Politics: शिवसेना में फिर महासंग्राम! 6 सांसदों के दलबदल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा उद्धव गुट, जल्द सुनवाई की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल होने का विवाद अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गया है। मंगलवार, 21 जुलाई को उद्धव गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा दिए गए विलय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया है।
देर रात जारी स्पीकर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना (UBT) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने दलील दी कि संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले देर रात जारी किए गए इस फैसले ने पार्टी के संसदीय कामकाज को पूरी तरह ठप कर दिया है। कामत ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि दोनों गुटों के बीच पार्टी के अधिकार और नाम का विवाद पहले से ही शीर्ष अदालत में लंबित है। उन्होंने कहा कि कोई भी निर्वाचित सांसद अपनी मूल पार्टी की लिखित सहमति के बिना किसी प्रतिद्वंद्वी दल में स्वतः विलय नहीं कर सकता, इसलिए यह फैसला सीधे तौर पर मौजूदा संसद सत्र को प्रभावित करता है।
शिंदे गुट में शामिल हुए ये 6 सांसद: जानिए संसद में बदला सीटों का समीकरण
उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका देते हुए उनके 6 प्रमुख सांसदों ने एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना का दामन थाम लिया है। विलय करने वाले सांसदों में यवतमाल से संजय देशमुख, परभणी से संजय जाधव, मुंबई उत्तर पूर्व से संजय दीना पाटिल, हिंगोली से नागेश पाटिल-अष्टिकार, धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस विलय को आधिकारिक मंजूरी दिए जाने के बाद निचले सदन में शिंदे नीत शिवसेना के सांसदों की संख्या बढ़कर 7 से 13 हो गई है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के पास अब केवल 3 सांसद रह गए हैं।
2022 से चला आ रहा है पार्टी का असली हकदार होने का कानूनी विवाद
उल्लेखनीय है कि जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 17 फरवरी 2023 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एकनाथ शिंदे गुट को ही असली शिवसेना मानते हुए पार्टी का नाम और मूल चुनाव चिह्न 'तीर-धनुष' आवंटित किया था। चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है। अब 6 सांसदों के पाला बदलने के बाद इस कानूनी लड़ाई का नया अध्याय शुरू हो गया है।