Maharashtra Protocol Change: अब दागी नेताओं को नहीं मिलेगा VIP सम्मान शिंदे सरकार का बड़ा फैसला, सजायाफ्ता और जांच के घेरे में फंसे नेताओं के लिए बदले नियम

News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार ने प्रोटोकॉल (शिष्टाचार) के नियमों में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब सरकारी अधिकारियों को उन विधायकों या सांसदों के सम्मान में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी, जो किसी अपराध में दोषी पाए गए हैं या जिनके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है। सरकार के इस कदम को भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।खत्म हुआ ‘जी हजूरी’ का दौर, अधिकारियों को मिली बड़ी राहत अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई जनप्रतिनिधि किसी सरकारी दफ्तर में पहुंचता है, तो प्रोटोकॉल के तहत अधिकारियों को उनके सम्मान में अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ती है। लेकिन नए संशोधन के बाद, उन नेताओं को यह ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ नहीं मिलेगा जिनका रिकॉर्ड बेदाग नहीं है। महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शिष्टाचार केवल उन्हीं के लिए है जो कानून का सम्मान करते हैं। इस फैसले से प्रशासनिक गलियारों में अधिकारियों ने राहत की सांस ली है, जो अक्सर दागी नेताओं के दबाव में रहते थे।किन नेताओं पर लागू होगा यह नया नियम? सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह नियम मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के नेताओं पर गाज गिराएगा। पहले वे विधायक या सांसद जिन्हें किसी अदालत ने दोषी करार दिया है। दूसरे वे जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर मामलों में विभागीय या न्यायिक जांच (Inquiry) लंबित है। और तीसरे वे जो जेल की सजा काट चुके हैं। ऐसे नेताओं के आने पर अब अधिकारी न तो खड़े होंगे और न ही उन्हें पहले जैसा वीआईपी प्रोटोकॉल दिया जाएगा।प्रोटोकॉल संशोधन के पीछे सरकार की क्या है मंशा? शिंदे सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुचिता से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि कोई जनसेवक अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो वह जनता और प्रशासन के सम्मान का हकदार नहीं रह जाता। इस बदलाव से सरकारी दफ्तरों में ‘पावर गेम’ कम होने की उम्मीद है और अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा।विपक्ष में खलबली, क्या बढ़ेगी सियासी तकरार? महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद सियासी पारा चढ़ना तय माना जा रहा है। विपक्ष के कई नेता इस वक्त विभिन्न जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। ऐसे में विपक्षी दल इसे बदले की राजनीति का हिस्सा बता सकते हैं। हालांकि, आम जनता के बीच इस फैसले की सराहना हो रही है क्योंकि यह ‘VIP कल्चर’ पर सीधी चोट है। अब देखना यह होगा कि जमीनी स्तर पर अधिकारी इस नए प्रोटोकॉल को कितनी कड़ाई से लागू करते हैं।