Male Breast Cancer Warning: पुरुषों में भी तेजी से बढ़ रहा स्तन कैंसर, सीने में इन मामूली दिखने वाले बदलावों को न करें नजरअंदाज

आमतौर पर स्तन कैंसर को केवल महिलाओं से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह धारणा पूरी तरह गलत है। हालांकि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह बीमारी अपेक्षाकृत कम पाई जाती है (कुल ब्रेस्ट कैंसर मामलों का लगभग 1 प्रतिशत), लेकिन पुरुषों में इसके घातक होने का खतरा काफी अधिक रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण जागरूकता का अभाव है। पुरुष अक्सर सीने में होने वाली किसी भी गांठ, दर्द या त्वचा के बदलाव को साधारण फैट, जिम इंजरी या उम्र बढ़ने का असर समझकर लंबे समय तक अनदेखा कर देते हैं। जब तक वे ऑन्कोलॉजिस्ट या सर्जन के पास पहुंचते हैं, तब तक कैंसर एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुका होता है। समय पर लक्षणों की पहचान और सही जांच से पुरुषों में भी स्तन कैंसर का सफल इलाज संभव है।
पुरुषों में स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण: जिन्हें कभी न करें अनदेखा
पुरुषों में ब्रेस्ट टिश्यू की मात्रा महिलाओं के मुकाबले काफी कम होती है। इस वजह से जब भी कोई ट्यूमर पनपता है, वह छाती की मांसपेशियों और आसपास के लिम्फ नोड्स में बहुत तेजी से फैल सकता है। यदि शरीर में निम्नलिखित में से कोई भी संकेत दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
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छाती या निप्पल के पास सख्त गांठ: सीने में निप्पल के ठीक नीचे या आसपास बिना दर्द वाली एक सख्त गांठ (Lump) का महसूस होना इसका सबसे प्राथमिक लक्षण है। यह गांठ छूने पर सख्त लगती है और हिलती-डुलती नहीं है।
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निप्पल में बदलाव या अंदर धंसना: निप्पल का अचानक अंदर की तरफ मुड़ जाना (Inverted Nipple) या उसकी दिशा बदल जाना एक गंभीर चेतावनी हो सकती है।
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निप्पल से स्राव या डिस्चार्ज: निप्पल से किसी भी तरह का तरल पदार्थ, पानी जैसा रिसाव या खून आना कैंसर का स्पष्ट लक्षण हो सकता है।
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त्वचा की बनावट में बदलाव: सीने की त्वचा पर गड्ढे पड़ना (Dimpling), संतरे के छिलके जैसी त्वचा दिखना, लालिमा आना या त्वचा का पपड़ीदार (Flaky) होना।
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कांख (Armpit) में सूजन: बगल या कॉलरबोन के पास लिम्फ नोड्स का सूज जाना या वहां कोई छोटी गांठ उभर आना।
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर होने के मुख्य कारण और रिस्क फैक्टर्स
हर पुरुष के शरीर में जन्म के समय सीमित मात्रा में ब्रेस्ट टिश्यू होते हैं। जब शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन होता है या जेनेटिक म्यूटेशन होता है, तो ये कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं:
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बढ़ती उम्र: यह कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 60 से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में इसका जोखिम सर्वाधिक देखा जाता है।
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जेनेटिक और फैमिली हिस्ट्री: यदि परिवार में किसी महिला या पुरुष को पहले ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर रहा हो, तो आनुवंशिक जोखिम बढ़ जाता है। विशेष रूप से BRCA1 और BRCA2 जीन म्यूटेशन वाले पुरुषों में यह खतरा कई गुना अधिक होता है।
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एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन: शरीर में फीमेल हार्मोन (एस्ट्रोजन) का स्तर बढ़ना और मेल हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का कम होना एक बड़ा कारण बनता है। ऐसा लिवर सिरोसिस, हार्मोनल थेरेपी या क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) जैसी आनुवंशिक स्थितियों के कारण हो सकता है।
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मोटापा और सुस्त जीवनशैली: अत्यधिक मोटापा शरीर में वसा ऊतकों को बढ़ाता है, जो एस्ट्रोजन के उत्पादन को गति देते हैं।
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रेडिएशन का इतिहास: यदि अतीत में सीने के आसपास किसी अन्य बीमारी के लिए रेडिएशन थेरेपी दी गई हो, तो भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर और गायनेकोमास्टिया में क्या अंतर है?
अक्सर पुरुष सीने में बढ़े हुए उभार को देखकर घबरा जाते हैं। अधिकांश मामलों में पुरुषों की छाती में होने वाला उभार 'गायनेकोमास्टिया' (Gynecomastia) होता है, जो कि पूरी तरह एक बिनाइन (गैर-कैंसरयुक्त) स्थिति है। गायनेकोमास्टिया हार्मोनल बदलावों के कारण दोनों स्तनों में समान रूप से होता है और इसमें ऊतक मुलायम व थोड़े स्पंजी महसूस होते हैं।
इसके विपरीत, ब्रेस्ट कैंसर आमतौर पर केवल एक ही तरफ (एक ब्रेस्ट में) होता है, पत्थर जैसा कड़ा महसूस होता है और छूने पर आसानी से त्वचा के नीचे नहीं फिसलता। हालांकि, किसी भी संदेह को केवल शारीरिक स्पर्श से तय नहीं किया जा सकता, इसके लिए चिकित्सकीय जांच अनिवार्य होती है।
जांच और आधुनिक उपचार के विकल्प
यदि किसी पुरुष को सीने में कोई गांठ या असामान्य परिवर्तन महसूस होता है, तो डॉक्टर सबसे पहले अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी और बायोप्सी (FNAC या कोर बायोप्सी) कराने की सलाह देते हैं। बायोप्सी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोशिकाएं कैंसरयुक्त हैं या नहीं।
कैंसर की पुष्टि होने पर बीमारी की स्टेज और ग्रेड के आधार पर इलाज की रूपरेखा तय की जाती है:
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सर्जरी (Mastectomy): चूंकि पुरुषों में ब्रेस्ट टिश्यू कम होते हैं, इसलिए सर्जरी के माध्यम से प्रभावित ऊतकों और पास के लिम्फ नोड्स को पूरी तरह निकाल दिया जाता है।
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हार्मोन थेरेपी: अधिकांश पुरुष ब्रेस्ट कैंसर 'हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव' होते हैं, इसलिए दवाओं (जैसे टैमोक्सीफेन) के जरिए एस्ट्रोजन को ब्लॉक किया जाता है ताकि कैंसर दोबारा न पनपे।
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कीमोथेरेपी और रेडिएशन: उच्च जोखिम वाले मामलों में या कैंसर को फैलने से रोकने के लिए सर्जरी के बाद रेडिएशन और कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है।
पुरुषों को अपनी शारीरिक सेहत को लेकर झिझक या शर्म छोड़कर किसी भी प्रकार की गांठ दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि शुरुआती स्तर पर पकड़ा गया कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है।