धर्म

Matangi Jayanti 2026 : तंत्र की नौवीं महाशक्ति मां मातंगी की जयंती आज, जानें मुहूर्त,अद्भुत स्वरूप और पूजन के फायदे

News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष महत्व है। आज यानी 20 अप्रैल 2026 को देशभर में ‘मातंगी जयंती’ हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। मां मातंगी दस महाविद्याओं में नौवीं महाशक्ति मानी जाती हैं। तंत्र शास्त्र के अनुसार, देवी मातंगी की साधना न केवल सांसारिक कष्टों को दूर करती है, बल्कि साधक को कला, वाणी और गृहस्थ सुख का वरदान भी देती है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं मां मातंगी और क्यों उनकी पूजा आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है।मातंगी जयंती 2026: क्या है शुभ मुहूर्त?पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ हो चुका है और इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 07:27 बजे होगा। उदयातिथि की महत्ता के कारण आज ही के दिन शक्ति पीठों और मंदिरों में माता का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। आज के दिन किया गया दान-पुण्य और कन्या पूजन अक्षय फल देने वाला माना जाता है।श्याम वर्ण और माथे पर अर्धचंद्र: मां मातंगी का दिव्य स्वरूपदेवी मातंगी का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और कल्याणकारी है। उनका वर्ण ‘श्याम’ (सांवला) है और उनके मस्तक पर द्वितीय का अर्धचंद्र सुशोभित है। उन्हें ‘उच्छिष्ट चाण्डाली’ या ‘राजमातङ्गी’ के नाम से भी पुकारा जाता है। मां के हाथों में वीणा, कपाल और खड्ग इस बात का प्रतीक हैं कि वे ज्ञान, संहार और सृजन तीनों की अधिष्ठात्री देवी हैं।वाणी दोष से मुक्ति और दांपत्य सुख: क्यों करें मां की उपासना?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां मातंगी की भक्ति के लाभ अद्भुत हैं:वाणी में ओज: जो लोग अपनी बात स्पष्ट नहीं कह पाते या जिन्हें हकलाने की समस्या है, उनके लिए मां की पूजा चमत्कारिक है।कला में सिद्धि: संगीत, नृत्य और लेखन से जुड़े जातकों के लिए मां मातंगी मुख्य आराध्य हैं।खुशहाल वैवाहिक जीवन: माना जाता है कि माता की कृपा से पति-पत्नी के बीच के क्लेश दूर होते हैं और परिवार में सामंजस्य बढ़ता है।बौद्धिक क्षमता: जटिल विषयों को समझने और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की शक्ति देवी की कृपा से प्राप्त होती है।कैसे प्रकट हुईं मां मातंगी? पौराणिक कथा का रहस्यमां मातंगी के प्राकट्य को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, मतंग ऋषि ने सिद्धियां प्राप्त करने के लिए देवी त्रिपुरा की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी की आंखों से जो दिव्य ज्योति निकली, उसने श्याम वर्ण देवी का रूप ले लिया। मतंग ऋषि की पुत्री होने के कारण इन्हें ‘मातंगी’ कहा गया। दूसरी कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती ने जब ‘चाण्डाल’ रूप धारण कर लीला की थी, तब माता पार्वती के उस शक्ति स्वरूप को मातंगी के नाम से जाना गया।जयंती पर कैसे करें पूजन?आज के दिन मंदिरों में माता का भव्य श्रृंगार किया जाता है। घर पर पूजा करते समय मां को पीले या नीले रंग के फूल अर्पित करना शुभ होता है। जयंती के दिन कन्याओं को भोजन कराने और उन्हें उपहार देने से मां मातंगी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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