MBBS वालों को बड़ी राहत, फर्स्ट ईयर के लिए मिलेंगे 5 मौके

देशभर के मेडिकल छात्रों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की तरफ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे उन हजारों विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है जो पहले साल की परीक्षा (First Professional MBBS Examination) को लेकर लंबे समय से तनाव में थे। अक्सर देखा जाता था कि कड़े नियमों और सीमित अवसरों के चलते कई मेधावी छात्र शुरुआती चरणों में ही अटक जाते थे और उनका पूरा करियर अधर में लटक जाता था। इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए एनएमसी ने एक बड़ा कदम उठाया है और शैक्षणिक सत्र 2019-20 व उसके बाद से एडमिशन लेने वाले पात्र छात्रों को फर्स्ट ईयर की परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त यानी पांचवां मौका देने का ऐतिहासिक फैसला किया है।
क्या है एनएमसी का नया नियम और किसे मिलेगा इसका सीधा फायदा?
नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से जारी आधिकारिक सार्वजनिक सूचना के अनुसार, जो छात्र शैक्षणिक वर्ष 2019-20 या उसके बाद से एमबीबीएस कोर्स में नामांकित हुए हैं, उन्हें अब पहले साल की परीक्षा को क्लीयर करने के लिए कुल पांच अवसर प्रदान किए जाएंगे। अब तक के पुराने नियमों के तहत छात्रों को फर्स्ट ईयर पास करने के लिए सिर्फ चार ही मौके मिलते थे, जिससे कई छात्र चार प्रयास समाप्त होने के बाद तनाव का शिकार हो जाते थे। एनएमसी के इस एकमुश्त राहत (One-time relief) के बाद अब छात्रों को परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त मर्सी अटेम्प्ट की सुविधा मिल गई है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि यह विशेष छूट केवल उन्हीं छात्रों के लिए मान्य है जिन्होंने नियमों के तहत अपने शुरुआती चार मौके गंवा दिए हैं लेकिन अभी तक अपना कोर्स पूरा करने की कुल समय सीमा के दायरे में आते हैं।
क्यों पड़ी इस अतिरिक्त मौके की जरूरत? कोविड और अन्य व्यवधानों का असर
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के लचीलेपन की मांग लंबे समय से देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों, छात्रों और अभिभावकों द्वारा की जा रही थी। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में महामारी के दौर और अन्य प्रशासनिक तथा व्यक्तिगत कारणों से छात्रों की अकादमिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा था। कई यूनिवर्सिटी और मेडिकल छात्र लगातार यह अपील कर रहे थे कि शुरुआती प्रोफेशनल्स परीक्षाओं में यदि किसी छात्र को किन्हीं अपरिहार्य कारणों से असफलता मिलती है, तो उसका पूरा करियर बर्बाद होने से बचाने के लिए एक निष्पक्ष और उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। एनएमसी ने तमामित स्टेकहोल्डर्स और विश्वविद्यालयों से प्राप्त इन अभ्यावेदनों पर गंभीरता से विचार करते हुए इस एकमुश्त समाधान को मंजूरी दी है।
10 साल की समय सीमा का नियम रहेगा बरकरार, छात्रों को रखनी होगी सावधानी
भले ही एनएमसी ने छात्रों को परीक्षा देने के लिए पांच मौके देने की बड़ी राहत दी है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्ते भी जुड़ी हुई हैं जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस एक अतिरिक्त मौके मिलने का यह बिल्कुल अर्थ नहीं है कि छात्र अपनी मर्जी के मुताबिक असीमित समय ले सकें। एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन की तारीख से लेकर पूरी डिग्री और अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) को पूरा करने की अधिकतम समय सीमा 10 साल ही तय की गई है। यानी छात्रों को इसी निर्धारित दस साल के समग्र दायरे के भीतर ही अपनी पढ़ाई और सभी परीक्षाएं हर हाल में पूरी करनी होंगी।
किन छात्रों को नहीं मिलेगा इस नियम का लाभ? आयोग ने दी कड़ी चेतावनी
इस बात को लेकर स्पष्टता होना बेहद जरूरी है कि यह नया निर्देश हर छात्र पर लागू नहीं होगा। एनएमसी ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि जिन विद्यार्थियों ने पहले ही अपने सभी निर्धारित पांच मौके या पूर्व में मिले मर्सी अटेम्प्ट्स का पूरा उपयोग कर लिया है, वे इस नई छूट के तहत किसी भी छठे मौके के पात्र नहीं माने जाएंगे। इसके अलावा, यह एकमुश्त छूट केवल लंबित और विशेष मामलों के लिए एक अस्थायी राहत के रूप में लाई गई है। इसे भविष्य के सभी बैचों के लिए एक स्थाई नियम या अधिकार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। देश के सभी मेडिकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे इस ताजा सार्वजनिक नोटिस के प्रावधानों का अध्ययन करें और पात्र विद्यार्थियों को तदनुसार राहत सुनिश्चित करें।
मेडिकल छात्रों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि एनएमसी का यह संवेदनशीलता से भरा निर्णय देश के भावी डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके करियर को सुरक्षा देने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है। कई बार अत्यधिक दबाव और तनाव के कारण प्रतिभाशाली छात्र भी शुरुआती दौर में पिछड़ जाते हैं, ऐसे में एक अतिरिक्त अवसर मिलने से उन्हें अपनी क्षमताओं को साबित करने का पूरा मौका मिलेगा। छात्र समुदाय में इस फैसले को लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और वे अब नए उत्साह के साथ अपनी पढ़ाई और परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए हैं।