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Monsoon Diseases Rules: बरसात के मौसम में तेजी से फैलती हैं ये 4 खतरनाक बीमारियां, जानें इनके लक्षण और खुद को बचाने के उपाय

कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के बाद जब बरसात का मौसम आता है, तो मौसम सुहाना हो जाता है और लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलती है। लेकिन यह खूबसूरत मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियां और बीमारियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में अचानक नमी (Humidity) का स्तर बेतहाशा बढ़ जाता है, और जगह-जगह जलभराव (Waterlogging) की समस्या आम हो जाती है। ऐसे रुके हुए पानी और उमस भरे माहौल में हानिकारक मच्छर, वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं।

यही कारण है कि मानसून के दस्तक देते ही देश भर में संक्रामक बीमारियों का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होती है, उन्हें अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए। आइए बिना किसी काट-छांट के सीधे जानते हैं कि बरसात के मौसम में कौन-कौन सी मुख्य बीमारियां फैलती हैं और उनके लक्षण क्या हैं।

1. डेंगू (Dengue): रुके हुए साफ पानी में पनपता है इसका मच्छर, प्लेटलेट्स गिरना है मुख्य संकेत

बरसात के दिनों में सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारियों में से एक डेंगू है, जिसका रिस्क इस मौसम में सबसे ज्यादा होता है।

  • कारण: डेंगू की बीमारी एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) प्रजाति के मादा मच्छर के काटने से फैलती है। इस मच्छर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गंदे पानी में नहीं, बल्कि आपके घरों के आसपास जमा साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। जैसे— घर की छत पर पड़े पुराने टायर, बंद पड़े कूलर, गमलों की ट्रे, खुली हुई पानी की टंकी या डिब्बे।

  • प्रमुख लक्षण: डेंगू होने पर अचानक बहुत तेज बुखार आता है, जिसे 'हड्डी तोड़ बुखार' भी कहते हैं। इसके अलावा तेज सिरदर्द, आंखों के पिछले हिस्से में तेज चुभन और दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में भयंकर दर्द की समस्या होती है। इस बीमारी में मरीज के खून में मौजूद प्लेटलेट्स (Platelets) का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति बेहद नाजुक और जानलेवा हो सकती है।

2. टाइफाइड (Typhoid): दूषित पानी और संक्रमित भोजन से लीवर-पाचन तंत्र पर होता है हमला

बारिश के मौसम में भारी जलभराव के कारण अक्सर पीने के पानी के पाइपलाइन में सीवेज या गंदा पानी मिक्स हो जाता है, जिससे जल स्रोत पूरी तरह संक्रमित हो जाते हैं।

  • कारण: यह बीमारी साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नाम के बैक्टीरिया के कारण होती है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और मक्खियों द्वारा संक्रमित किए गए भोजन के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करता है। टाइफाइड का सीधा हमला इंसान के पाचन तंत्र और आंतों पर होता है।

  • प्रमुख लक्षण: टाइफाइड के मरीजों को कई दिनों तक लगातार रहने वाला तेज बुखार, पेट में मरोड़ और तेज दर्द, लगातार सिरदर्द, अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और भूख में भारी कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

3. वायरल फीवर (Viral Fever): तापमान के उतार-चढ़ाव से एक-दूसरे में तेजी से फैलता है संक्रमण

बरसात के दिनों में कभी तेज धूप तो कभी अचानक तेज बारिश होने के कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। हवा में मौजूद अत्यधिक नमी के कारण वायरस हवा में लंबे समय तक जीवित रहते हैं।

  • कारण: मौसम में यह अचानक बदलाव हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को धीमा कर देता है, जिससे रेस्पिरेट्री और अन्य वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। वायरल फीवर एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खांसने, छींकने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत आसानी से फैल जाती है।

  • प्रमुख लक्षण: इसमें मरीज को कंपकंपी के साथ तेज बुखार, गले में भयंकर खराश या दर्द, सूखी या बलगम वाली खांसी, पूरे शरीर और पीठ में जकड़न व दर्द और अत्यधिक सुस्ती महसूस होती है।

4. फूड पॉइजनिंग और दस्त (Food Poisoning & Diarrhea): सड़क किनारे के खुले खाने से पूरी तरह बनाएं दूरी

उमस और गर्मी के इस मिले-जुले मौसम में बैक्टीरिया इतनी तेजी से बढ़ते हैं कि घर या बाहर रखा हुआ से खाना बहुत जल्दी खराब या बासी हो जाता है।

  • कारण: कई बार अनजाने में खराब या फंगस लगा हुआ भोजन खा लेने से पेट में भयंकर इन्फेक्शन हो जाता है, जिसे फूड पॉइजनिंग कहते हैं। खासकर मानसून के दौरान सड़क किनारे (Street Food) मिल रहे खुले कटे हुए फल, चाट-पकौड़ी और दूषित पानी से बने जूस का सेवन करने से इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। लापरवाही बरतने पर फूड पॉइजनिंग इतनी गंभीर हो सकती है कि मरीज के शरीर में पानी की कमी (Dehydration) के कारण जान पर बन आती है।

  • प्रमुख लक्षण: खाना खाने के कुछ घंटों बाद ही लगातार उल्टियां होना, पेट में असहनीय मरोड़ और दर्द, बार-बार दस्त (Diarrhea) होना, जी मिचलाना और शरीर का तापमान बढ़ना इसके मुख्य संकेत हैं।

मानसून में सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये जरूरी हेल्थ टिप्स

  • कूलर और गमलों की सफ़ाई: अपने घर के भीतर या आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी हफ्ते में एक बार जरूर बदलें और उसमें थोड़ा सा केरोसिन या पेट्रोल डाल दें।

  • उबला हुआ पानी: इस पूरे मौसम में पानी को हमेशा अच्छी तरह उबालकर और छानकर ही पिएं, ताकि सभी बैक्टीरिया नष्ट हो जाएं।

  • फुल आस्तीन के कपड़े: मच्छरों के काटने से बचने के लिए सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो लिक्विड का इस्तेमाल करें और बाहर निकलते समय फुल आस्तीन के कपड़े पहनें।

  • ताजा भोजन: हमेशा पूरी तरह ढका हुआ और ताजा बना हुआ गर्म भोजन ही ग्रहण करें। फ्रिज में रखे बहुत पुराने बासी खाने को खाने से पूरी तरह परहेज करें।

सलाह: बरसात में होने वाली किसी भी बीमारी को साधारण मौसमी बुखार समझने की भूल न करें। यदि बुखार 2 दिन से ज्यादा रहता है, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क कर ब्लड टेस्ट करवाएं और बिना चिकित्सकीय परामर्श के मेडिकल स्टोर से लेकर कोई भी एंटीबायोटिक या पेनकिलर दवा न खाएं।

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