MSME सेक्टर को बड़ा तोहफा: कैबिनेट बैठक में ₹10,000 करोड़ के SME ग्रोथ फंड को मिल सकती है हरी झंडी, बजट ऐलान पर अमल

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को जल्द ही केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ा वित्तीय संबल मिलने जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की आगामी बैठक में बहुप्रतीक्षित ₹10,000 करोड़ के 'एसएमई ग्रोथ फंड' (SME Growth Fund) के औपचारिक प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में इस महत्वाकांक्षी फंड की स्थापना की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। अब संबंधित मंत्रालयों और नीति आयोग के बीच विस्तृत विचार-विमर्श पूरा होने के बाद कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों—लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, भदोही—से लेकर गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के एमएसएमई क्लस्टर्स के लिए यह फैसला गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह फंड उन उद्यमों को सीधे पूंजीगत सहायता देगा जो विस्तार और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड कैसे करेगा काम
अक्सर देखा जाता है कि छोटे उद्यमों को बैंक से पारंपरिक लोन तो मिल जाता है, लेकिन उनके पास दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी (Equity Capital) या रिस्क कैपिटल का भारी अभाव रहता है। प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड इसी बुनियादी कमी को पाटने के लिए डिजाइन किया गया है।
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फंड ऑफ फंड्स मॉडल: इस कोष को 'फंड ऑफ फंड्स' (Fund of Funds) संरचना के तहत संचालित किया जाएगा। इसका प्रबंधन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) या नेशनल क्रेडिट ट्रस्टी कंपनी द्वारा किया जाएगा।
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अतिरिक्त निजी पूंजी जुटाना (Crowding-in Private Capital): सरकार के इस 10,000 करोड़ रुपये के सीड फंड के आधार पर अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और वेंचर कैपिटल फर्म्स से निजी पूंजी जुटाई जाएगी, जिससे कुल उपलब्ध वित्तीय पूल ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
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इक्विटी और क्वासी-इक्विटी निवेश: तेजी से बढ़ते हुए छोटे उद्यमों (Fast-Growing SMEs) को शेयर पूंजी या क्वासी-इक्विटी के रूप में पैसा दिया जाएगा, जिससे उन पर तुरंत मासिक ब्याज या ईएमआई चुकाने का दबाव नहीं पड़ेगा और वे अपने कारोबार को बड़े पैमाने पर ले जा सकेंगे।
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आईपीओ (IPO) की तैयारी: यह फंड उन एमएसएमई इकाइयों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाएगा जो भविष्य में बीएसई एसएमई (BSE SME) या एनएसई इमर्ज (NSE Emerge) प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होकर पब्लिक इश्यू लाना चाहती हैं।
छोटे उद्यमों के सामने आ रही पूंजीगत चुनौतियों का होगा समाधान
वर्तमान में देश में लगभग 6.3 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो देश की जीडीपी में 30% से अधिक और कुल निर्यात में करीब 45% का योगदान देती हैं। इसके बावजूद, इस क्षेत्र को औपचारिक बैंकिंग चैनलों से सस्ती और समय पर पूंजी जुटाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जमानत (Collateral) की कमी और कठोर क्रेडिट रेटिंग प्रक्रियाओं के चलते कई होनहार उद्यम अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते। प्रस्तावित ग्रोथ फंड विशेष रूप से उन सेक्टरों पर केंद्रित होगा जो हाई-ग्रोथ और रोजगार सृजन से जुड़े हैं, जैसे कि एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल व गारमेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर, एग्री-प्रोसेसिंग और ग्रीन एनर्जी समाधान। फंड के माध्यम से उद्यमों को ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, सीएनसी मशीनरी और डिजिटल सप्लाई चेन अपनाने के लिए लंबी अवधि की पूंजी मिल सकेगी।
रोजगार सृजन और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा भारी बूस्ट
सरकार का प्राथमिक लक्ष्य केवल वित्तीय मदद देना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना है। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के तहत घरेलू स्तर पर आयात विकल्पों को तैयार करने वाले छोटे उद्योगों को इस फंड से प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी लघु उद्योग के पास निर्यात के बड़े ऑर्डर हैं लेकिन वर्किंग कैपिटल और प्लांट विस्तार की क्षमता नहीं है, तो यह फंड उसमें हिस्सेदारी खरीदकर उसकी क्षमता को दोगुना-तिगुना करने में मदद करेगा। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर कुशल व अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से महानगरों की ओर होने वाले अनियंत्रित पलायन पर भी लगाम लगेगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद कब से धरातल पर उतरेगी योजना
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल से हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) इसके विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश (Operational Guidelines) और पात्रता मानदंड जारी करेंगे। इसके तहत एक उच्चस्तरीय संचालन समिति बनाई जाएगी, जो फंड आवंटन की निष्पक्षता और गति की निगरानी करेगी। डिजिटल पोर्टल के माध्यम से आवेदन, अप्रूवल और मॉनिटरिंग की पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस और पारदर्शी रखा जाएगा ताकि लालफीताशाही से बचा जा सके। दिवाली और आगामी त्योहारी सीजन के ठीक पहले सरकार की ओर से इस फंड को मिलने वाली मंजूरी छोटे कारोबारियों के लिए एक बड़े बूस्टर डोज का काम करेगी, जिससे देश के औद्योगिक उत्पादन इंडेक्स (IIP) में भी उछाल आने की पूरी उम्मीद है।