Multigrain Atta आज से ही खाना शुरू किया तो वजन और शुगर पर पड़ेगा गजब का असर

आज के दौर में जब हमारी जीवनशैली पूरी तरह से बदल चुकी है, खानपान की गलत आदतें हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रही हैं। सुबह की चाय से लेकर रात के डिनर तक, हमारी थाली का सबसे मुख्य हिस्सा रोटी या चपाती होती है, जो अमूमन सामान्य गेहूं के आटे (Plain Wheat Flour) से बनाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गेहूं के आटे से बनी रोटियां हम वर्षों से खाते आ रहे हैं, क्या वे हमारे आधुनिक और सुस्त लाइफस्टाइल के हिसाब से पूरी तरह फायदेमंद हैं या फिर धीरे-धीरे हमारे शरीर में मोटापा और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों को बुलावा दे रही हैं? आज के समय में हेल्थ एक्सपर्ट्स और डाइटीशियन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर हम अपनी डाइट में थोड़ा सा बदलाव कर लें और सामान्य आटे की जगह 'मल्टीग्रेन आटा' (Multigrain Atta) को अपना लें, तो सेहत में चमत्कारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आइए एक हेल्थ रिपोर्टर की नजर से गहराई से समझते हैं कि अगर आप आज से ही मल्टीग्रेन आटे का सेवन शुरू कर दें, तो आपके शरीर, वजन और ब्लड शुगर पर इसका क्या गहरा असर पड़ेगा।
सामान्य गेहूं का आटा और मल्टीग्रेन आटे में आखिर क्या है मुख्य अंतर?
पारंपरिक रूप से हमारे घरों में जिस गेहूं के आटे का इस्तेमाल होता है, उसे आधुनिक मिलों में अत्यधिक रिफाइंड करके या ऊपरी छिलके को हटाकर तैयार किया जाता है, जिससे गेहूं के अधिकांश प्राकृतिक फाइबर और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत, मल्टीग्रेन आटा कई तरह के अनाजों और बीजों को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें मुख्य गेहूं के साथ-साथ जौ (Barley), चना (Roasted Gram), बाजरा (Pearl Millet), ज्वार (Sorghum), सोयाबीन (Soybean), मक्का और कई बार अलसी (Flaxseeds) या मेथी के बीज भी शामिल होते हैं। इन सभी अनाजों का मिश्रण हमारे शरीर को एक साथ कार्बोहाइड्रेट, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, विटामिन्स और भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर प्रदान करता है। यही कारण है कि मल्टीग्रेन आटे की एक साधारण रोटी आपके शरीर के लिए किसी मल्टीविटामिन कैप्सूल से कम असरदार नहीं होती है।
वजन घटाने के सफर में कैसे वरदान साबित होता है मल्टीग्रेन आटे का सेवन?
यदि आप लंबे समय से अपने बढ़ते हुए वजन, तोंद और बैली फैट से परेशान हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद वजन कम नहीं हो पा रहा है, तो आपकी रसोई में रखा आटा इसका सबसे बड़ा समाधान बन सकता है। जब आप सामान्य मैदे या रिफाइंड गेहूं की रोटी खाते हैं, तो वह पचने में बहुत आसान होती है और शरीर में जाते ही तुरंत ग्लूकोज में बदलकर ब्लड शुगर को स्पाइक कर देती है, जिससे आपको बार-बार भूख लगती है। इसके उलट, मल्टीग्रेन आटे में मौजूद उच्च मात्रा में फाइबर (Dietary Fiber) पचने में लंबा समय लेता है। फाइबरयुक्त यह आटा पेट में जाने के बाद एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। आपको बार-बार अनहेल्थी स्नैक्स या जंक फूड खाने की इच्छा नहीं होती, जिससे आपकी कुल कैलोरी इंटेक अपने आप कम हो जाती है और वजन तेजी से नियंत्रित होने लगता है।
डायबिटीज और ब्लड शुगर के मरीजों के लिए क्यों है यह किसी अमृत से कम नहीं?
आज के समय में भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज के रोगियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कार्बोहाइड्रेट और शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना होता है। गेंहू के आटे में ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अपेक्षाकृत अधिक होता है, जो शुगर के मरीजों के लिए हानिकारक माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ, मल्टीग्रेन आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है। इसका मतलब यह है कि मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज बहुत ही धीमी गति से और नियंत्रित मात्रा में रिलीज होता है। इससे अचानक ब्लड शुगर लेवल में होने वाले खतरनाक उतार-चढ़ाव (Blood Sugar Spikes) रुक जाते हैं। यदि डायबिटिक मरीज आज से ही अपनी डाइट में मल्टीग्रेन आटे को शामिल कर लें, तो वे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार देख सकते हैं और अपनी बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं।
पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर पेट की तमाम समस्याओं से दिलाता है छुटकारा
खराब पाचन, गैस, एसिडिटी, कब्ज और पेट का ठीक से साफ न होना आज के समय में आम बीमारियां बन चुकी हैं, जिसकी मुख्य वजह हमारे खाने में फाइबर की कमी है। मल्टीग्रेन आटे में मौजूद विभिन्न अनाजों और बीजों का रफेज (Roughage) हमारे पेट की आंतों की सफाई के लिए एक नेचुरल ब्रश की तरह काम करता है। यह पेट में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और भोजन आसानी से पच जाता है। जिन लोगों को सुबह उठकर पेट साफ न होने की शिकायत रहती है, वे अगर कुछ हफ्तों तक लगातार मल्टीग्रेन आटे की रोटियों का सेवन करें, तो उनके पाचन तंत्र में गजब का सुधार देखने को मिलता है। पेट हल्का रहने से पूरा दिन ऊर्जावान और तरोताजा महसूस होता है।
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और दिल की सेहत के लिए है बेहद फायदेमंद
हमारे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का बढ़ना दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है। मल्टीग्रेन आटे में इस्तेमाल होने वाले घटक जैसे जौ, चना और अलसी के बीज शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अचूक माने जाते हैं। इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त धमनियों में होने वाले ब्लॉकेज को रोकते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रखते हैं। जब दिल स्वस्थ रहता है, तो शरीर की उम्र लंबी होती है और आप कई तरह की गंभीर कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं से सुरक्षित रहते हैं।
बाजार का पैकेटबंद मल्टीग्रेन आटा खरीदें या घर पर खुद तैयार करें?
आजकल बाजार में तमाम बड़ी ब्रांड्स के 'मल्टीग्रेन आटा' के पैकेट धड़ल्ले से बिक रहे हैं, जिन पर कई तरह के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन एक समझदार उपभोक्ता होने के नाते आपको पैकेट के पीछे लिखे इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) को जरूर पढ़ना चाहिए। कई बार कंपनियों के आटे में सिर्फ नाम मात्र के लिए अन्य अनाज मिलाए जाते हैं और बाकी सादा मैदा या गेहूं ही होता है। सबसे बेहतरीन और सुरक्षित तरीका यह है कि आप अपनी पसंद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार गेहूं, चना, जौ, बाजरा और थोड़ा सा सोयाबीन या अलसी खुद खरीदकर किसी अच्छी चक्की से पिसवाएं। शुद्ध और ताजे रूप से तैयार किया गया यह घरेलू मल्टीग्रेन आटा आपके और आपके पूरे परिवार के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित होगा। आज ही अपनी थाली की इस छोटी सी आदत में बदलाव लाएं और एक स्वस्थ तथा सुखी जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।