Nargis vs Shammy: जब एक नाम बन गया करियर की रुकावट जानें कैसे नरगिस से शम्मी बनीं ये मशहूर अदाकारा

News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड में पहचान बनाना कभी आसान नहीं रहा, और कई बार तो सितारों का असली नाम ही उनके रास्ते की दीवार बन जाता है। ऐसी ही एक दिलचस्प कहानी है हिंदी सिनेमा की चहेती ‘शम्मी आंटी’ यानी शम्मी (Shammi) की। 1940 और 50 के दशक में अपनी मुस्कान से सबका दिल जीतने वाली इस अभिनेत्री को अपनी पहचान इसलिए बदलनी पड़ी क्योंकि उस दौर में एक और ‘नरगिस’ का जादू सिल्वर स्क्रीन पर सिर चढ़कर बोल रहा था।नरगिस बनाम नरगिस: जब नाम ने पैदा की उलझनशम्मी का असली नाम नरगिस रबाडी था। जब उन्होंने 1949 में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, तो संयोग से उसी समय दिग्गज अभिनेत्री नरगिस (सुनील दत्त की पत्नी) पहले से ही एक बड़ी स्टार बन चुकी थीं। फिल्म ‘उस्ताद पेड्रो’ के डायरेक्टर और निर्माता तारा हरीश को डर था कि दो ‘नरगिस’ होने से दर्शक भ्रमित हो जाएंगे। उन्होंने साफ कह दिया कि यदि इस इंडस्ट्री में टिकना है, तो नाम बदलना होगा।शम्मी: एक नया नाम और नई पहचाननिर्देशक की सलाह पर नरगिस रबाडी ने अपना स्क्रीन नाम ‘शम्मी’ रख लिया। इस नाम के साथ उनकी किस्मत ऐसी चमकी कि उनकी पहली फिल्म ‘उस्ताद पेड्रो’ बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1950 के दशक में वे एक ऐसी अभिनेत्री बन गईं जो लीड रोल से लेकर सपोर्टिंग और कॉमेडी किरदारों में फिट बैठती थीं।मधुबाला और नूतन के साथ जमी जोड़ीशम्मी ने अपने लंबे करियर में 200 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने उस दौर की दिग्गज अभिनेत्रियों—मधुबाला, नूतन और आशा पारेख—के साथ कई यादगार फ़िल्में दीं। ‘संगदिल’, ‘साजिश’ और ‘मुसाफिरखाना’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की खूब सराहना हुई। शम्मी की खासियत यह थी कि वे पर्दे पर जितनी सहज दिखती थीं, असल जिंदगी में भी उतनी ही मिलनसार थीं।शम्मी आंटी: टीवी की चहेती दादी-नानीनई पीढ़ी के दर्शकों के लिए शम्मी ‘शम्मी आंटी’ के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उन्होंने ‘देख भाई देख’ और ‘जबान संभाल के’ जैसे कल्ट कॉमेडी शो में अपनी कॉमिक टाइमिंग से सबको खूब हंसाया। 2018 में 89 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ ही बॉलीवुड के उस स्वर्ण युग का एक और सितारा ओझल हो गया, जिसने केवल अपने काम और व्यवहार से इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई थी।