मनोरंजन

Neha Sharma AI Deepfake Warning: अभिनेत्री नेहा शर्मा ने सोशल मीडिया यूजर्स को दी सख्त कानूनी चेतावनी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के बेलगाम दुरुपयोग के बीच बॉलीवुड हस्तियों की निजता और सुरक्षा पर लगातार संकट गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में चर्चित बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा शर्मा (Neha Sharma) ने सोशल मीडिया पर सक्रिय कंटेंट क्रिएटर्स और इंटरनेट यूजर्स को बेहद कड़े शब्दों में अंतिम कानूनी चेतावनी जारी की है। अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए साफ कर दिया है कि उनकी स्पष्ट लिखित सहमति (Explicit Consent) के बिना उनके चेहरे, आवाज या शारीरिक विशेषताओं का उपयोग करके किसी भी प्रकार की एआई-जनरेटेड तस्वीरें, डीपफेक वीडियो या डिजिटल क्लोन बनाना पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने दो टूक कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी महिला की व्यक्तिगत गरिमा और प्राइवेसी का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के साइबर विशेषज्ञों से लेकर मुंबई और दिल्ली के कानूनी जानकारों तक, नेहा शर्मा के इस सख्त कदम को डिजिटल दौर में पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर जारी किया कड़ा संदेश: प्राइवेसी कोई खेल नहीं

नेहा शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही बिना अनुमति तैयार की गई एआई सामग्री पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक बयान में लिखा कि पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि कई पेजेस, यूट्यूब चैनल्स और डिजिटल क्रिएटर्स बिना किसी अनुमति के उनकी तस्वीरों को मॉर्फ कर रहे हैं और जनरेटिव एआई टूल्स के जरिए फर्जी वीडियो व तस्वीरें बनाकर पोस्ट कर रहे हैं।

नेहा ने चेतावनी देते हुए कहा, "मेरी स्पष्ट सहमति के बिना मेरा चेहरा या पहचान इस्तेमाल कर एआई सामग्री बनाना कला या मनोरंजन नहीं, बल्कि मेरी व्यक्तिगत सीमाओं और निजता पर सीधा हमला है। यह केवल एक चेतावनी नहीं है; यदि कोई भी व्यक्ति या हैंडल ऐसी गैर-सहमति वाली सामग्री पोस्ट करने, प्रमोट करने या बेचने में संलिप्त पाया गया, तो मेरी कानूनी टीम संबंधित प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर साइबर क्राइम सेल में एफआईआर दर्ज कराएगी और भारी हर्जाने का मुकदमा करेगी।"

डीपफेक और एआई का बढ़ता दायरा: बॉलीवुड पर मंडराता खतरा

हाल के महीनों में जनरेटिव एआई टूल्स की आसान उपलब्धता के चलते मशहूर हस्तियों के चेहरे को अवांछित, आपत्तिजनक या भ्रामक वीडियो में बदलने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इससे पहले रश्मिका मंदाना, आलिया भट्ट, काजोल और कैटरीना कैफ जैसी शीर्ष अभिनेत्रियां भी डीपफेक वीडियो का शिकार हो चुकी हैं। अब यह खतरा केवल आपत्तिजनक सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रिएटर्स व्यूज, लाइक्स और विज्ञापनों से पैसा कमाने के लिए अभिनेत्रियों के डिजिटल अवतार बनाकर भ्रामक उत्पाद बेच रहे हैं या फर्जी लाइफस्टाइल व्लॉग्स तैयार कर रहे हैं। नेहा शर्मा ने स्पष्ट किया कि किसी भी कलाकार की पहचान उसकी बौद्धिक और व्यक्तिगत संपत्ति होती है, जिसे कोई भी इंटरनेट यूजर अपनी मनमर्जी से भुना नहीं सकता।

कानून की नजर में अपराध: आईटी एक्ट और बीएनएस के तहत कड़े प्रावधान

साइबर कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका चेहरा मॉर्फ करना या एआई वीडियो बनाना कानूनी रूप से संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है।

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act): धारा 66E के तहत किसी की सहमति के बिना उसकी गोपनीयता भंग करने वाले दृश्य कैप्चर या प्रकाशित करना दंडनीय है। धारा 66D के तहत कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके पहचान चुराकर धोखाधड़ी करने पर 3 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 67 और 67A के तहत किसी भी आपत्तिजनक या मॉर्फ्ड सामग्री को प्रसारित करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023): नए आपराधिक कानूनों के तहत किसी की पहचान का गलत इस्तेमाल कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के तहत कड़े दंड का आधार बनता है।

  • व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights): दिल्ली उच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि मशहूर हस्तियों का नाम, आवाज, चेहरा और शैली उनके निजी 'पर्सनैलिटी राइट्स' के अंतर्गत आते हैं। व्यावसायिक या गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए सेलिब्रिटी की औपचारिक अनुमति अनिवार्य है।

डिजिटल क्रिएटर्स और यूजर्स के लिए जरूरी सतर्कता

सोशल मीडिया पर महज रील्स वायरल करने या कुछ हजार फॉलोअर्स जुटाने की होड़ में युवा अक्सर यह भूल जाते हैं कि फेस-स्वैप ऐप्स और एआई जनरेटर का अनधिकृत इस्तेमाल उन्हें साइबर सेल की चौखट तक पहुंचा सकता है। वकीलों का परामर्श है कि:

  • किसी भी सेलिब्रिटी, मॉडल या आम नागरिक के चेहरे का इस्तेमाल करके बिना अनुमति एआई मॉडल या अवतार न बनाएं।

  • यदि कोई यूजर किसी सार्वजनिक मंच पर ऐसा डीपफेक वीडियो देखता है, तो उसे लाइक या रीशेयर करने के बजाय तत्काल रिपोर्ट (Report) करे, क्योंकि दुर्भावनापूर्ण सामग्री को बढ़ावा देना भी डिजिटल सह-अपराध का हिस्सा बन सकता है।

  • प्लेटफॉर्म्स—जैसे मेटा, यूट्यूब और एक्स—को भी ऐसे मामलों में शिकायत मिलते ही 24 से 36 घंटे के भीतर सामग्री हटाने की वैधानिक बाध्यता होती है।

प्राइवेसी की जंग में कलाकारों की एकजुटता

नेहा शर्मा की इस खरी-खरी चेतावनी को फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों का भारी समर्थन मिल रहा है। कई साथी कलाकारों ने उनकी पोस्ट पर सहमति जताते हुए कहा है कि तकनीक का विकास इंसानी गरिमा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। डिजिटल स्पेस में एआई की असीमित शक्तियों पर कड़े नियामक नियम और वाटरमार्किंग गाइडलाइंस की मांग अब तेज हो गई है। नेहा शर्मा का यह कानूनी रुख यह संदेश देता है कि चाहे तकनीक कितनी भी आधुनिक हो जाए, किसी की सहमति (Consent) का बुनियादी सिद्धांत कभी पुराना नहीं हो सकता।

Back to top button