NMCH में MBBS और PG सीटों को बढ़ाने की तैयारी, लेकिन NMC की मंजूरी के आगे खड़ी है बदहाली की दीवार

News India Live, Digital Desk: बिहार के प्रतिष्ठित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस (MBBS) और पीजी (PG) सीटों की संख्या में इजाफा करने की कवायद शुरू कर दी है। कॉलेज प्रबंधन चाहता है कि राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए अधिक छात्रों को दाखिला मिले। हालांकि, इस नेक इरादे के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की सख्त गाइडलाइंस और कॉलेज की जर्जर बुनियादी ढांचा (Infrastructure) सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है। यदि समय रहते कमियों को दूर नहीं किया गया, तो सीटों में बढ़ोतरी का सपना अधूरा रह सकता है।सीटों का गणित: पीजी की 50 और एमबीबीएस की 100 सीटों पर नजरNMCH प्रशासन ने एनएमसी को भेजे गए प्रस्ताव में एमबीबीएस की सीटों को वर्तमान संख्या से बढ़ाकर 250 करने और पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) की विभिन्न विंग्स में 50 अतिरिक्त सीटों की मांग की है। कॉलेज का तर्क है कि अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टरों और प्रशिक्षु डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना अनिवार्य है। लेकिन नियम के मुताबिक, जितनी सीटें बढ़ती हैं, उसी अनुपात में फैकल्टी, हॉस्टल और क्लासरूम की क्षमता भी बढ़ानी होती है, जिसमें कॉलेज फिलहाल पिछड़ता दिख रहा है।बुनियादी ढांचे में बड़ी खामियां: हॉस्टल से लेकर लैब तक बदहालएनएमसी की टीम द्वारा किए गए प्रारंभिक आंतरिक मूल्यांकन में कई चौंकाने वाली कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेज में छात्रों के रहने के लिए पर्याप्त हॉस्टल नहीं हैं और जो हैं, उनकी हालत बेहद खराब है। इसके अलावा, पैथोलॉजी और एनाटॉमी लैब में आधुनिक उपकरणों की कमी है। सबसे गंभीर मुद्दा फैकल्टी की कमी का है; कई विभागों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। बिना इन मानकों को पूरा किए एनएमसी से हरी झंडी मिलना नामुमकिन लग रहा है।सरकार से मदद की गुहार: क्या समय पर होगा कायाकल्प?NMCH प्रशासन ने बिहार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर तत्काल फंड और संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि यदि सरकार युद्धस्तर पर काम शुरू करती है, तो आगामी निरीक्षण तक हम अधिकांश कमियों को दूर कर सकते हैं। फिलहाल, छात्रों और अभिभावकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पटना का यह ऐतिहासिक मेडिकल संस्थान अपनी खामियों को सुधार कर बिहार के युवाओं के लिए डॉक्टर बनने की राह और आसान कर पाएगा।