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Pakistan Terror Attack: पाकिस्तान में अपने ही बोए कांटे! टांक जिले में बड़ा फिदायीन हमला, 12 सैनिकों समेत 15 की मौत

पाकिस्तान लंबे समय से जिस आतंकवाद को पनाह और हवा देता रहा है, अब वही भस्मासुर बनकर उसके अपने सुरक्षा बलों पर टूट रहा है। उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत के टांक (Tank) जिले में एक भीषण और सुनियोजित आत्मघाती (फिदायीन) आतंकी हमला हुआ है।

बारूद से लदी गाड़ी के धमाके में पाकिस्तानी सेना के 12 सैनिकों, 2 पुलिसकर्मियों और 1 सरकारी अधिकारी समेत कुल 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसकी जवाबी गोलीबारी में 12 उग्रवादी (आतंकी) भी मारे गए हैं।

कैसे अंजाम दिया गया चेकपोस्ट पर हमला?

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ISPR (Inter-Services Public Relations) के बयान के अनुसार, यह घटना अफगानिस्तान सीमा के पास टांक जिले में सेना और पुलिस की संयुक्त सुरक्षा जांच चौकी पर घटी।

  1. घुसपैठ की नाकाम कोशिश: आतंकियों ने सबसे पहले चेकपोस्ट का सुरक्षा घेरा तोड़कर परिसर के अंदर घुसने का प्रयास किया। मुस्तैद जवानों ने उन्हें ललकारा और दोनों तरफ से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई।

  2. बारूद से भरी गाड़ी से जोरदार टक्कर: जब आतंकी अंदर घुसने में नाकाम रहे, तो बौखलाहट में उन्होंने विस्फोटक से लदी अपनी तेज रफ्तार गाड़ी को सीधे चेकपोस्ट की बाहरी सुरक्षा दीवार से टकरा दिया।

  3. भयावह तबाही: विस्फोट इतना जबरदस्त था कि चेकपोस्ट की पूरी इमारत ध्वस्त हो गई और वहां मौजूद कई जवान और पुलिसकर्मी मलबे में दब गए, जिससे भारी जनहानि हुई।

प्रतिबंधित संगठन TTP ने ली हमले की जिम्मेदारी

इस घातक हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP / पाकिस्तानी तालिबान) ने ली है। TTP ने बयान जारी कर दावा किया कि उसके 4 फिदायीन हमलावरों ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

हमले के तुरंत बाद पूरे टांक जिले और आसपास के इलाकों को पाकिस्तानी सेना व अर्धसैनिक बलों ने सील कर दिया है और इलाके में बचे हुए आतंकियों के खिलाफ व्यापक सर्च ऑपरेशन ('Sanitization Operation') चलाया जा रहा है।

पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर फिर फूटा गुस्सा

हमले के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना ने एक बार फिर पड़ोसी देश अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आरोप मढ़े हैं। पाकिस्तान का कहना है कि TTP के लड़ाके अफगान सरजमीं का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के रूप में कर रहे हैं। वे वहीं से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं और घटनाओं को अंजाम देकर वापस सीमा पार भाग जाते हैं। हालांकि, काबुल स्थित तालिबान सरकार इन आरोपों को बार-बार खारिज करती रही है।

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