Parliament Monsoon Session 2026: ‘अयोध्या मंदिर चंदा चोरी से देश में गुस्सा’, मानसून सत्र से पहले मायावती का बड़ा हमला; पक्ष-विपक्ष दोनों को दी नसीहत!

लखनऊ। सोमवार, 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे संसद के हंगामेदार मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति और देश के विधायी गलियारों में सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने सत्र की शुरुआत से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर केंद्र सरकार और विपक्षी गठबंधन दोनों को आड़े हाथों लिया है। मायावती ने साफ तौर पर कहा कि संसद का यह सत्र राजनीतिक नारेबाजी या हंगामे की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए, बल्कि देश के जलते हुए मुद्दों पर गंभीर और संवेदनशील बहस का केंद्र बनना चाहिए।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बड़ा बयान: 'सड़क से अदालत तक लोगों में गुस्सा'
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावा चोरी (Ram Temple Donation Embezzlement) के मामले को बेहद गंभीरता से उठाया है। उन्होंने इसे देश को झकझोर देने वाला मुद्दा बताते हुए लिखा:
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भावनाओं को ठेस: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी, हेराफेरी और गबन की खबरों से उत्तर प्रदेश और पूरे देश की जनता में भारी आक्रोश है।
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चुनावी लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल: मायावती ने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपने चुनावी लाभ के लिए धर्म का राजनीतिकरण (Politicization of Religion) किया है, आज आम जनता उनके इस कृत्य से आहत है और उनसे जवाब मांग रही है। यह मुद्दा सड़क से लेकर अदालत तक गूंज रहा है और संसद में भी इस पर गरमागरम बहस होना तय है।
महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक पर संसद में 'हंगामा नहीं, समाधान' हो
मायावती ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हर बार की तरह देश की जनता इस बात को लेकर आशंकित है कि क्या संसद का यह सत्र भी केवल हंगामे और स्थगन (Adjournments) की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर जनप्रतिनिधि आम आदमी की समस्याओं को लेकर कोई संजीदगी दिखाएंगे। उन्होंने संसद में तुरंत चर्चा के लिए निम्नलिखित 5 जलते हुए राष्ट्रीय मुद्दे गिनाए:
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आसमान छूती महंगाई और गरीबी: देश का बहुजन (गरीब, शोषित और वंचित वर्ग) लगातार बढ़ती महंगाई की मार झेल रहा है, जिस पर तुरंत नियंत्रण जरूरी है।
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बेरोजगारी का संकट (Unemployment): युवाओं के पास रोजगार नहीं है, जिससे देश का भविष्य अधर में लटका हुआ है。
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लगातार होते पेपर लीक: छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले नीट (NEET Paper Leak) और अन्य पेपर लीक मामलों पर सरकार को स्पष्ट नीति रखनी होगी।
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महिला असुरक्षा: विभिन्न राज्यों से आ रही महिलाओं के साथ अपराध की खबरें देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही हैं।
रुपये की गिरावट और वैश्विक युद्ध संकट पर एकजुटता की अपील
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पश्चिम एशिया (West Asia Conflict) में जारी तनाव, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के हालात और इसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे विपरीत असर, जैसे—रुपये का लगातार कमजोर होना (Devaluation of Rupee), बेहद चिंताजनक राष्ट्रीय मुद्दे हैं।
मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से अपील की है कि वे अपनी राजनीतिक कटुता, संकीर्ण सोच और व्यक्तिगत स्वार्थों को परे रखकर इन संकटों से निपटने के लिए एकजुट हों। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो देश की 140 करोड़ आबादी, विशेषकर गरीब और मध्यमवर्ग का जीवन आने वाले समय में और ज्यादा कष्टकारी हो जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने और सुशासन (Good Governance) के लिए इस मानसून सत्र से ही एक प्रभावी और रचनात्मक संसद की शुरुआत की जानी चाहिए।