Petrol Diesel Price : 29 अप्रैल के बाद क्या वाकई महंगा होगा पेट्रोल और डीजल ? 13% तक बढ़ी तेल की बिक्री

News India Live, Digital Desk: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर अफवाहों का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राज्यों में विधानसभा चुनाव (जैसे पश्चिम बंगाल) खत्म होते ही, यानी 29 अप्रैल के बाद तेल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इस ‘प्राइस हाइक’ के डर से आम जनता में घबराहट देखी जा रही है, जिसका सीधा असर पेट्रोल पंपों पर दिखने लगा है। अप्रैल के पहले तीन हफ्तों में ही ईंधन की बिक्री में 13 प्रतिशत का जोरदार उछाल दर्ज किया गया है।पैनिक बाइंग: स्टॉक करने की मची होड़कीमतें बढ़ने के डर से लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने और डिब्बों में तेल जमा करने में जुट गए हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 21 अप्रैल के बीच पेट्रोल-डीजल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जहां पिछले साल की समान अवधि में यह वृद्धि सामान्य थी, वहीं इस बार 13% का जंप बताता है कि जनता 29 अप्रैल की तारीख को लेकर डरी हुई है। हालांकि, पेट्रोलियम कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उनके पास आपूर्ति की कोई कमी नहीं है और वे इस बढ़ी हुई मांग को बखूबी संभाल रहे हैं।सरकार की दो टूक: ‘यह महज अफवाह और गुमराह करने वाली खबर’भारी हंगामे और बढ़ती मांग के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही 25-28 रुपये की बढ़ोतरी की खबरों को ‘शरारतपूर्ण और भ्रामक’ करार दिया है। मंत्रालय ने ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर कहा कि सरकार के पास फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी खबरें केवल नागरिकों के बीच डर और पैनिक पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं।भारत के पास कितना है तेल का भंडार?आपूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। मार्च 2026 के अंत तक के आंकड़ों के अनुसार:रणनीतिक भंडार (SPR): भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में स्थित रणनीतिक भंडार में लगभग 3.37 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल है (क्षमता का 64%)।कुल सुरक्षा कवर: अगर इसमें तेल कंपनियों के पास मौजूद कमर्शियल स्टॉक को भी जोड़ दिया जाए, तो भारत के पास लगभग 74 दिनों का सुरक्षित तेल भंडार मौजूद है।वैश्विक उतार-चढ़ाव: सरकार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के करीब होने के बावजूद, भारत ने पिछले चार सालों में कीमतें स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है।क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?बाजार विशेषज्ञों (कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज) की रिपोर्ट में तेल कंपनियों के ‘अंडर-रिकवरी’ (घाटे) का जिक्र किया गया था, जिसे आधार बनाकर बढ़ी कीमतों की अटकलें लगाई जा रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹20 और डीजल पर ₹100 प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि, सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है और आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहेगी।