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Petrol Price : आम आदमी की जेब पर गिरेगी महंगाई की बिजली18 महंगा हो सकता है पेट्रोल, डीजल में ₹35 के उछाल की चेतावनी

News India Live, Digital Desk: वैश्विक राजनीति में गहराते संकट का असर अब सीधे आपकी जेब और रसोई के बजट पर पड़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय ईंधन बाजार को लेकर एक बेहद डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। दिग्गज वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी (Macquarie) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश से झुलसेगा भारत!वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थिरता ने भारत सरकार और तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। मैक्वायरी की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि खाड़ी देशों में तनाव और अधिक बढ़ता है और कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में ₹18 प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में ₹35 प्रति लीटर तक का बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। यह आशंका तब जताई जा रही है जब वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है।क्यों बढ़ सकती हैं इतनी ज्यादा कीमतें?दरअसल, भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी सी भी हलचल सीधे तौर पर भारतीय तेल कंपनियों के मुनाफे और सरकारी खजाने पर दबाव डालती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जैसी स्थितियों के कारण तेल की सप्लाई ठप होती है, तो तेल कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए कीमतों का बोझ आम जनता पर डाल सकती हैं। डीजल की कीमतों में ₹35 की संभावित बढ़ोतरी माल ढुलाई और खेती की लागत को सीधे प्रभावित करेगी, जिससे महंगाई का एक नया चक्र शुरू हो सकता है।महंगाई की मार: फल, सब्जी और राशन भी होंगे महंगेअगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस स्तर की बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर केवल वाहन चलाने वालों तक ही सीमित नहीं रहेगा। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (माल ढुलाई की लागत) बढ़ जाएगी। ट्रक और मिनी वैन का किराया बढ़ने से मंडियों तक पहुंचने वाले फल, सब्जियां, दूध और राशन के दामों में भी भारी उछाल आएगा। यानी यह बढ़ोतरी न केवल आपकी गाड़ी के टैंक को खाली करेगी, बल्कि आपकी थाली का जायका भी बिगाड़ सकती है।आम जनता के पास क्या है विकल्प?फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, अभी तक कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन वैश्विक संकेतों ने खतरे की घंटी बजा दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतें इस बात पर निर्भर करेंगी कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव किस मोड़ पर जाता है। आम जनता को इस संभावित महंगाई के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने और बजट को संतुलित रखने की सलाह दी जा रही है।

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