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PM Modi Secretaries Meeting: AI के दौर में मानवीय बुद्धि न भूलें, कामचलाऊ सोच से बाहर निकलें; सचिवों के साथ बैठक में पीएम मोदी का कड़ा संदेश

देश की प्रशासनिक व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल तैयार करने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। नई दिल्ली में आयोजित इस विस्तृत मंथन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने शीर्ष नौकरशाहों को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया कि वे पारंपरिक और सुस्त कार्यशैली को पूरी तरह त्यागें। पीएम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी के इस दौर में हमें मानवीय बुद्धि (Human Intellect) और संवेदना के महत्व को कभी नहीं भूलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में 'चलता है' और 'कामचलाऊ' (Jugaad/Makeshift) वाली मानसिकता को हमेशा के लिए समाप्त करने का आह्वान किया।

AI और आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन

प्रशासनिक सुधारों और डिजिटलाइजेशन पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि सरकारी सेवाओं को तेज, पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए एआई (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। हालांकि, उन्होंने सचेत करते हुए कहा:

  • टेक्नोलॉजी समाधान है, विकल्प नहीं: एआई डेटा विश्लेषण और रूटीन प्रक्रियाओं को आसान बना सकता है, लेकिन अंतिम नीतिगत निर्णय, नीति निर्धारण और जनहित के मामलों में मानवीय समझ, विवेक और संवेदनशीलता का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

  • अंतिम व्यक्ति तक पहुंच: सचिवों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि नीतियां केवल फाइलों या डिजिटल डैशबोर्ड तक सीमित न रहें, बल्कि वे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाएं।

  • संवेदनशील प्रशासन: सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के दौरान तकनीकी जटिलताओं या तकनीकी खामियों के कारण किसी भी गरीब या वंचित व्यक्ति को अपने अधिकारों से वंचित न होना पड़े।

'चलता है' और कामचलाऊ सोच से बाहर निकलने की दो-टूक नसीहत

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र में गहराई से जमी 'कामचलाऊ सोच' (Makeshift Attitude) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत अब आधे-अधूरे उपायों या तात्कालिक समाधानों से संतुष्ट नहीं हो सकता।

  • विश्वस्तरीय गुणवत्ता के मानक: बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं में किसी भी प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय केवल काम पूरा करने के बजाय वैश्विक स्तर की गुणवत्ता (Global Standards) और टिकाऊपन को प्राथमिकता दी जाए।

  • समयबद्ध डिलीवरी: सरकारी परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लालफीताशाही (Red Tape), अंतर-मंत्रालयी विवाद या प्रक्रियात्मक देरी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हर प्रोजेक्ट के लिए स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तय की जाए।

  • सक्रिय शासन (Proactive Governance): समस्याओं के उत्पन्न होने के बाद समाधान खोजने के बजाय संभावित चुनौतियों का पहले से आकलन कर समय रहते रणनीति बनाई जाए।

साइलो संस्कृति को तोड़ें: अंतर-मंत्रालयी तालमेल पर जोर

प्रधानमंत्री ने सचिवों को विभिन्न मंत्रालयों के बीच अलग-थलग काम करने की 'साइलो मानसिकता' (Silo Culture) को पूरी तरह समाप्त करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पीएम गतिशक्ति (PM GatiShakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान और प्रगति (PRAGATI) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने यह साबित किया है कि जब विभाग मिलकर तालमेल के साथ काम करते हैं, तो विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स रिकॉर्ड समय में पूरे होते हैं। सभी सचिवों को निर्देश दिया गया कि वे नियमित रूप से संयुक्त बैठकें करें, डेटा का आदान-प्रदान करें और एक-दूसरे के संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करें।

विकसित भारत 2047 का रोडमैप और सुधारों का अगला चरण

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के रोडमैप पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने सचिवों से कहा कि वे अगले 5 और 10 वर्षों के स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य (Measurable KPIs) निर्धारित करें। बैठक में आर्थिक विकास, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business), ईज ऑफ लिविंग (Ease of Living), गैर-जरूरी कानूनों के सरलीकरण और वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने से जुड़े रणनीतिक विषयों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन और चर्चाएं की गईं।

नवाचार और युवा अधिकारियों के विचारों को प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नौकरशाहों से कहा कि वे अपने मंत्रालयों में नवाचार (Innovation) और नए विचारों को खुलकर प्रोत्साहित करें। फील्ड में काम कर रहे युवा आईएएस/आईपीएस और अन्य सिविल सेवा अधिकारियों के जमीनी अनुभवों और सुझावों को शीर्ष नीति-निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि प्रशासनिक सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और नौकरशाही को हर दिन एक नए ऊर्जा और समर्पण भाव के साथ जनसेवा के लिए कार्य करना चाहिए।

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