PoJK में बगावत की भीषण आग: पाकिस्तानी सेना की अंधाधुंध गोलीबारी में 80 से अधिक नागरिक शहीद

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में नागरिक अधिकारों, बेतहाशा महंगाई और हुकूमत के दमन के खिलाफ उठी विरोध की लपटें अब जनांदोलन का रूप ले चुकी हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पाकिस्तानी थल सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर और स्थानीय शासन के नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। सड़कों पर उतरे निहत्थे नागरिकों को शांत करने के बजाय पाकिस्तानी सुरक्षा बल उन पर गोलियां बरसा रहे हैं। बीते कुछ दिनों में ही दर्जनों मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे पूरा इलाका तनाव के मुहाने पर खड़ा है।
मीरपुर में खौफनाक मंजर: इबादत के दौरान इमाम की गोली मारकर हत्या
पाकिस्तानी रेंजर्स की बर्बरता का सबसे विचलित करने वाला मामला मीरपुर से सामने आया है। यहां की बिलाल मस्जिद में इबादत में लीन नमाजियों पर सुरक्षा बलों ने सीधी फायरिंग कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,Range अधिकारियों ने मस्जिद परिसर के भीतर घुसकर खरियान निवासी और मस्जिद के इमाम मौलाना इनायतुल्लाह के सिर में गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद सड़कों पर आम नागरिकों पर गोलियां चलाई गईं। घायलों को अस्पताल ले जाने से रोका जा रहा है और महिलाओं व पुरुषों पर समान रूप से अत्याचार किए जा रहे हैं।
दमन की इंतहा: 13 स्कूलों का पंजीकरण रद्द, इंटरनेट ठप और कर्फ्यू लागू
आंदोलन को मिल रहे भारी जनसमर्थन से बौखलाई सरकार ने उन 13 निजी व सरकारी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी है, जिनके शिक्षकों, कर्मचारियों या छात्रों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। अब इन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर गिरफ्तारियां करने की तैयारी चल रही है। पूरे PoJK में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं और कर्फ्यू लगा दिया गया है। इसके बावजूद, जन-आक्रोश कम नहीं हो रहा है और लोग रात के अंधेरे में भी सड़कों पर उतरकर अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
'आर-पार की जंग': JAAC प्रमुख की चेतावनी, शहीदों की संख्या 80 के पार
PoJK जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के वरिष्ठ नेता सरदार उमर नज़ीर कश्मीरी ने पाकिस्तानी हुकूमत को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि 5 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में अब तक 80 से ज्यादा निर्दोष कश्मीरी पाकिस्तानी सेना की गोलियों का शिकार होकर शहीद हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी सेना चाहे जितने भी टैंक और तोपें तैनात कर ले, PoJK की जनता अब अवैध कब्जे से मुक्ति और अपने बुनियादी अधिकार लेकर ही दम लेगी। रावलकोट में बढ़ते जनसैलाब को कुचलने के लिए सेना की नई टुकड़ियों को रवाना किया गया है।
पाकिस्तान की संसद से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक गूंजा कत्लेआम
इस हिंसा की गूंज अब पाकिस्तान की संसद तक पहुंच गई है। नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता महमूद खान अचकजई ने सेना की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि ऐसा महसूस हो रहा है जैसे इंसानों का पक्षियों की तरह शिकार किया जा रहा हो। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। 'यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी' ने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र (UN) को ज्ञापन सौंपकर रावलकोट और मीरपुर नरसंहार की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की है।