PoK में खूनी संघर्ष: चुनाव के दौरान पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई से 48 घंटों में 30 मौतें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिरेगी हुकूमत

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में विधानसभा चुनावों के माहौल के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण और खूनी हो चुके हैं। चुनाव प्रक्रिया के दौरान पिछले 48 घंटों में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में कम से कम 30 आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के अनुसार, इस खूनी संघर्ष में सोमवार को 25 और मंगलवार को 5 लोगों की जान चली गई है। यह चुनाव पूरी तरह से भारी राजनीतिक अशांति, हथियारों के बल पर की गई कार्रवाई, बड़े पैमाने पर धांधली और संपूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच संपन्न हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय लोगों का साफ तौर पर आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सीधे तौर पर अंधाधुंध गोलियां चलाई हैं और इस क्षेत्र को आतंक के साए में धकेल दिया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की कड़ी निंदा और स्वतंत्र जांच की मांग
इस भीषण मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसक घटनाओं के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एमनेस्टी साउथ एशिया की एक्टिंग डायरेक्टर इसाबेल लैसी ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा है कि पीओके में सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई यह कार्रवाई पाकिस्तान की उस पुरानी और गैर-कानूनी हिंसा की परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत वह हर आवाज को दबाना चाहता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मांग की है कि सुरक्षा बलों द्वारा किए गए इस बल प्रयोग की तुरंत, पूरी तरह से स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। संगठन ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई है कि पिछले 5 जून से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं, जिससे जमीनी हकीकत दुनिया के सामने आने से रोकी जा रही है। एमनेस्टी ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल सभी संचार माध्यमों को बहाल करने और स्वतंत्र मीडिया तथा पर्यवेक्षकों को इलाके में प्रवेश की अनुमति देने की मांग की है।
क्या है पूरा आंदोलन और क्यों भड़का है इस्लामाबाद का गुस्सा
यह पूरा विवाद और जनआंदोलन मूल रूप से जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इस आंदोलन की शुरुआत पीओके विधानसभा में उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग के साथ हुई थी, जो साल 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान की मुख्य भूमि में जाकर बस गए थे। समय के साथ यह मांग पाकिस्तानी शासन के खिलाफ इस इलाके में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जन-विद्रोह बन गया, जिसमें इस्लामाबाद के अवैध नियंत्रण और पाकिस्तानी सेना के दमनकारी रवैये का जमकर विरोध किया जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानूनों का हवाला देते हुए प्रतिबंध तक लगा दिया है। हिंसा का यह दौर केवल पिछले दो दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि जून की शुरुआत से अब तक इस पूरे आंदोलन में कुल 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं।
चुनाव के बीच JAAC संस्थापक के भाई की हत्या और विदेशों में प्रदर्शन
पाकिस्तानी सेना की इस क्रूर कार्रवाई का दायरा आम नागरिकों से लेकर आंदोलन के प्रमुख नेताओं के परिवारों तक फैल चुका है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, JAAC कोर टीम के सदस्य इम्तियाज असलम ने खुलासा किया है कि इस दमनकारी कार्रवाई के दौरान आंदोलन के संस्थापक उमर नजीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नजीर को भी मौत के घाट उतार दिया गया है। इस अमानवीय हत्या और पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के विरोध में विदेशों में भी गुस्सा फूट पड़ा है। यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड शहर में स्थित पाकिस्तानी कॉन्सुलेट के बाहर बड़ी संख्या में JAAC समर्थकों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया तथा पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। JAAC के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने की शुरुआत से लेकर अब तक पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में कम से कम 67 लोगों को अपनी गोलियों का शिकार बनाया है, जिससे पीओके के भीतर और बाहर भारी आक्रोश का माहौल है।