विपक्ष के लिए कांशीराम का सम्मान सिर्फ चुनावी दिखावा, मायावती ने कांग्रेस, सपा और BJP पर बोला बड़ा हमला

News India Live, Digital Desk: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आज बसपा संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती के अवसर पर विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लखनऊ में आयोजित भव्य कार्यक्रम में कांशीराम जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मायावती ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो पार्टियां आज कांशीराम जी की विरासत पर दावा कर रही हैं, वे दरअसल ‘वोट के सौदागर’ हैं।विपक्ष पर तीखा प्रहार: “सिर्फ सत्ता के लिए याद आ रहे हैं कांशीराम”मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ और प्रेस बयान के जरिए कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों के लिए दलित महापुरुषों को याद करना अब एक “अवसरवादी फैशन” बन गया है। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के हालिया कार्यक्रमों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब ये पार्टियां सत्ता में थीं, तब इन्हें न तो बाबा साहेब अंबेडकर याद आए और न ही मान्यवर कांशीराम।कांग्रेस और सपा के ‘ढोंग’ का किया पर्दाफाशमायावती ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कुछ कड़े सवाल पूछे:भारत रत्न का मुद्दा: उन्होंने पूछा कि कांग्रेस ने दशकों तक केंद्र की सत्ता संभाली, लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न देने के लिए 1990 तक का इंतजार क्यों करना पड़ा?राष्ट्रीय शोक पर सवाल: बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि जब मान्यवर कांशीराम जी का निधन हुआ था, तब केंद्र में बैठी कांग्रेस और यूपी की सपा सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था।आरक्षण में विरोध: उन्होंने कांग्रेस और सपा को घेरते हुए कहा कि इन पार्टियों ने संसद में ‘पदोन्नति में आरक्षण’ (Reservation in Promotion) बिल का समर्थन करने के बजाय उसे फाड़ने का काम किया था।सपा के ‘PDA’ को बताया बड़ा छलावासमाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर हमला करते हुए मायावती ने इसे चुनावी स्वार्थ करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा की राजनीति हमेशा से दलित विरोधी रही है। मायावती ने उदाहरण दिया कि लखनऊ में स्थापित ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी उर्दू, अरबी, फारसी यूनिवर्सिटी’ का नाम पहले सपा सरकार ने बदला और फिर भाजपा सरकार ने उसे ‘भाषा विश्वविद्यालय’ बनाकर उसके महत्व को खत्म कर दिया।बहुजन समाज से ‘मास्टर चाबी’ हासिल करने का आह्वानमायावती ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि “सत्ता की मास्टर चाबी” हासिल करना ही कांशीराम जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज से एकजुट होकर बसपा के झंडे तले आने को कहा, ताकि संविधान में प्रदत्त अधिकारों को जमीन पर लागू किया जा सके।