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RBI का बड़ा एक्शन! 13 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 10 कंपनियों ने सरेंडर किया सर्टिफिकेट; जानें वजह

भारतीय वित्तीय तंत्र को सुरक्षित, पारदर्शी और नियमों के अनुकूल बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) पर बड़ा नियामक चाबुक चलाया है। केंद्रीय बैंक ने कड़े कदम उठाते हुए 13 एनबीएफसी के पंजीकरण प्रमाण पत्र (Certificate of Registration – CoR) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके अतिरिक्त, 10 अन्य वित्तीय संस्थानों ने अपना कारोबार बंद करने या नियमों के पुनर्गठन के चलते स्वेच्छा से अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आरबीआई को सरेंडर कर दिया है। रिजर्व बैंक द्वारा 9 अक्टूबर को जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद देश के वित्तीय और बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया है। आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि वित्तीय अनुशासन, पूंजी पर्याप्तता और उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी करने वाली किसी भी संस्था को देश के बैंकिंग ढांचे में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

13 कंपनियों पर क्यों गिरी गाज और पश्चिम बंगाल से क्या है बड़ा कनेक्शन

रिजर्व बैंक ने यह दंडात्मक कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए (6) के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए की है। केंद्रीय बैंक की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जिन 13 एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें से 11 कंपनियां अकेले पश्चिम बंगाल (विशेषकर कोलकाता) से संचालित हो रही थीं। इन कंपनियों पर समय-समय पर वित्तीय रिटर्न दाखिल न करने, आरबीआई के विवेकपूर्ण मानदंडों (Prudential Norms) की अनदेखी करने और कानूनी इकाई के रूप में अस्तित्व खोने जैसे गंभीर उल्लंघन पाए गए। इनमें से कुछ कंपनियां जैसे वंदना गृह निर्माण लिमिटेड और रामसिसारिया बिल्डर्स लिमिटेड विलय (Merger), विघटन (Dissolution) या कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा स्ट्राइक-ऑफ होने के कारण पहले ही वैधानिक अस्तित्व खो चुकी थीं। लाइसेंस रद्द होने के बाद अब ये सभी 13 कंपनियां किसी भी प्रकार का वित्तीय लेनदेन, ऋण वितरण या गैर-बैंकिंग संस्था के रूप में जनता से जमा स्वीकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित हो चुकी हैं।

10 एनबीएफसी ने क्यों सरेंडर किया अपना लाइसेंस

एक अलग आधिकारिक बयान में रिजर्व बैंक ने बताया कि 10 अन्य एनबीएफसी ने अपना पंजीकरण प्रमाण पत्र स्वयं वापस कर दिया है। इन कंपनियों द्वारा लाइसेंस सरेंडर करने के पीछे कई परिचालन और रणनीतिक कारण रहे हैं। कुछ कंपनियों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार से पूरी तरह बाहर निकलने (Business Exit) का निर्णय लिया, जबकि कई कंपनियों ने अनिवार्य पंजीकरण आवश्यकताओं से छूट प्राप्त श्रेणियों में खुद को पुनर्गठित कर लिया। सरेंडर करने वाली प्रमुख कंपनियों में प्रगति फिनकैप लिमिटेड, राजलक्ष्मी वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड, विवृत्ति कैपिटल लिमिटेड, एमएसजे कॉलोनाइजिंग एंड लीजिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, पीकेएसएल इनवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और एचसीएल कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी इकाइयां शामिल हैं। इन कंपनियों के आवेदन और कानूनी औपचारिकताओं की समीक्षा के बाद आरबीआई ने इनके प्रमाण पत्रों को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया है।

आम जमाकर्ताओं और कर्जदारों पर क्या होगा इसका सीधा असर

आरबीआई द्वारा गैर-अनुपालन वाली एनबीएफसी के खिलाफ चलाए जा रहे इस सफाई अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य आम जनता की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना है। अक्सर अनधिकृत या निष्क्रिय एनबीएफसी के नाम पर बाजार में अवैध लोन ऐप्स, ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज वसूली और फर्जी निवेश योजनाओं का जाल फैलाया जाता है। जब केंद्रीय बैंक ऐसे लाइसेंस निरस्त करता है, तो आम नागरिकों के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी का काम करता है कि वे इन कंपनियों के साथ किसी भी नए वित्तीय सौदे में न पड़ें। जिन ग्राहकों का इन कंपनियों में पहले से कोई बकाया या कानूनी लेन-देन चल रहा है, उसका निपटारा मौजूदा अनुबंध और संबंधित ट्रिब्यूनल के माध्यम से ही किया जाएगा, लेकिन नई कारोबारी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई से लखनऊ तक एनबीएफसी सेक्टर पर सख्त निगरानी

देशभर में फिनटेक और एनबीएफसी के जरिए डिजिटल लोन का बाजार जिस तेजी से बढ़ा है, उसी अनुपात में डिफॉल्ट और धोखाधड़ी की शिकायतें भी बढ़ी हैं। देश की वित्तीय राजधानी मुंबई, दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर और पटना जैसे तेजी से बढ़ते व्यापारिक केंद्रों में भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की गतिविधियां बहुत व्यापक हैं। आरबीआई ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को यह सख्त निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सक्रिय एनबीएफसी के बहीखातों, ऑडिट रिपोर्ट, रिकवरी एजेंटों के आचरण और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र की लगातार समीक्षा करते रहें। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की इस सख्त स्क्रीनिंग से केवल वही कंपनियां बाजार में टिक पाएंगी जो पारदर्शी गवर्नेंस और मजबूत बैलेंस शीट के साथ काम कर रही हैं।

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