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RBI की ओर से मिल सकता है बड़ा झटका, अगले महीने बढ़ सकती है रेपो रेट, BofAS की रिपोर्ट में खुलासा

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बड़ा अनुमान सामने आया है. बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक RBI 7 अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नया दौर शुरू होने का अनुमान है.

रिपोर्ट में पहले दिसंबर में दर बढ़ने का अनुमान लगाया गया था. अब बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने अक्टूबर में ही पहली बढ़ोतरी की संभावना जताई है. इसके साथ ही कुल दर बढ़ोतरी का अनुमान भी पहले के 50 बेसिस पॉइंट से बढ़ाकर 100 बेसिस पॉइंट कर दिया गया है.

2027 की पहली छमाही तक 6.25% रेपो रेट

रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद दिसंबर 2026 तक रेपो रेट में कुल 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. इसके बाद 2027 की पहली छमाही में एक और 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान है.

इस हिसाब से RBI का रेपो रेट 2027 की पहली छमाही तक बढ़कर 6.25% हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर तक पहली 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी पूरी होने के बाद RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने वाली नीति अपना सकता है.

महंगाई ने बढ़ाई चिंता

दरें बढ़ाने के पीछे घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार और महंगाई का बढ़ता दबाव अहम वजह माना जा रहा है. देश में निवेश और कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है. वहीं ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी, खाद्य महंगाई और दूसरी वस्तुओं की कीमतों में दबाव बढ़ने से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है.

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के मुताबिक ऊर्जा कीमतों में दोबारा बढ़ोतरी और ईंधन की कीमतों में संभावित तेजी से महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में RBI के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक नरम बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.

मजबूत विकास दर भी एक वजह

रिपोर्ट के मुताबिक देश की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं. कर्ज की मांग में सुधार और कंपनियों की आय में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है. इसके अलावा कंपनियों की कीमतें बढ़ाने की क्षमता भी दिखाई दे रही है.

ऐसे में अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कम ब्याज दर बनाए रखने की जरूरत पहले के मुकाबले कम हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार आने वाले महीनों में RBI का ध्यान आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के बजाय महंगाई को नियंत्रित करने पर ज्यादा हो सकता है.

वैश्विक माहौल भी चुनौती

रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर ऊंची अमेरिकी ब्याज दरों और जिंस कीमतों को भी अहम जोखिम बताया गया है. घरेलू महंगाई और विकास से जुड़े नए आंकड़ों के साथ वैश्विक परिस्थितियां RBI के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला करना महत्वपूर्ण बना रही हैं.

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