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Sharmila-Pataudi Love Story : पेरिस में हुआ था इजहार और फिर बनीं आयशा सुल्तान शर्मिला टैगोर और नवाब पटौदी की वो प्रेम कहानी

News India Live, Digital Desk : जब बॉलीवुड की ‘ग्लैमर क्वीन’ और भारतीय क्रिकेट के ‘नवाब’ एक-दूसरे के प्यार में गिरफ्तार हुए, तो उस दौर में यह किसी बड़ी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा था। शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी (टाइगर) की जोड़ी ने न केवल धर्म की दीवारें गिराईं, बल्कि यह भी साबित किया कि सच्चा प्यार हर चुनौती से ऊपर है।1. पेरिस की सड़कों पर फिल्मी अंदाज में प्रपोजलइन दोनों की पहली मुलाकात 1965 में एक कॉमन फ्रेंड के जरिए दिल्ली में हुई थी। लेकिन प्यार का आधिकारिक इजहार सात समंदर पार फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ।नवाब का अंदाज: नवाब पटौदी ने पेरिस की एक खूबसूरत शाम को शर्मिला को प्रपोज किया था। दिलचस्प बात यह है कि शर्मिला को मनाने के लिए पटौदी ने उन्हें लगातार चार साल तक गुलाब के फूल और तोहफे भेजे थे।2. धर्म की दीवार और ‘आयशा सुल्तान’ का जन्मउस दौर में एक हिंदू अभिनेत्री और मुस्लिम नवाब का निकाह आसान नहीं था। दोनों के परिवारों की ओर से काफी विरोध हुआ।इस्लाम धर्म अपनाया: पटौदी खानदान की बहू बनने के लिए शर्मिला टैगोर ने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम बदलकर ‘आयशा सुल्तान’ रख लिया।ऐतिहासिक निकाह: 27 दिसंबर 1968 को दोनों का निकाह हुआ, जो उस समय की सबसे चर्चित शादी थी।3. बिकिनी विवाद और नवाब का साथनिकाह से ठीक पहले शर्मिला टैगोर अपनी फिल्म ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ और एक मैगजीन कवर के लिए बिकिनी पहनने को लेकर विवादों में थीं।सपोर्टिव पार्टनर: जहाँ पूरी दुनिया शर्मिला की आलोचना कर रही थी, वहीं नवाब पटौदी उनके साथ ढाल बनकर खड़े रहे। उन्होंने शर्मिला के काम और पसंद का हमेशा सम्मान किया, जो उस रूढ़िवादी दौर में एक मिसाल थी।4. एक सफल सफर और शानदार विरासतयह जोड़ी 42 सालों तक (2011 में नवाब पटौदी के निधन तक) एक साथ रही। उनकी इस विरासत को उनके बच्चों— सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान ने बखूबी आगे बढ़ाया है। आज भी जब रॉयल कपल की बात होती है, तो ‘पटौदी और टैगोर’ का नाम सबसे ऊपर आता है।

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