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SpiceJet NCLT Dispute: विवाद सुलझाने की दिशा में स्पाइसजेट, NCLT में खत्म हुआ तनाव; एयरलाइन ने कहा- अब फ्लीट और उड़ानों को बेहतर बनाने पर पूरा फोकस

वित्तीय संकट, कानूनी मुकदमों और ग्राउंडेड विमानों की समस्या से जूझ रही भारत की प्रमुख बजट एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में चल रहे दिवालिया कार्यवाही (Insolvency Proceedings) के विवाद को सुलझाने की दिशा में एयरलाइन ने अहम सफलता हासिल की है। एयरक्राफ्ट लेसर एविएटर एमएल (Aviator ML) के साथ लगभग ₹60 करोड़ के विवाद पर आपसी समझौते (Settlement) के बाद ट्रिब्यूनल ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है। इस घटनाक्रम के बाद एयरलाइन प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका पूरा ध्यान अब अदालती उलझनों से निकलकर अपनी उड़ानों की गुणवत्ता सुधारने, ग्राउंडेड जहाजों को दोबारा आसमान में उड़ाने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने पर केंद्रित है।

NCLT में क्या था पूरा मामला और कैसे बनी बात?

स्पाइसजेट के खिलाफ विमान लीज पर देने वाली कंपनी एविएटर एमएल ने बकाया भुगतान न होने का आरोप लगाते हुए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 9 के तहत दिवालिया याचिका दायर की थी। ट्रिब्यूनल इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रख चुका था। हालांकि, दोनों पक्षों ने अदालत के बाहर आपसी सहमति से समाधान निकालते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत स्पाइसजेट ने शुरुआती भुगतान जारी कर दिया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने एविएटर एमएल को अपनी याचिका वापस लेने की औपचारिक मंजूरी दे दी।

उड़ान सेवाओं और विमान बेड़े (Fleet) को दोबारा खड़ा करने पर जोर

एनसीएलटी के फैसले का स्वागत करते हुए स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा कि यह समझौता लंबित मामलों को सुलझाने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक और ठोस कदम है। एयरलाइन ने माना कि वह एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरी है, लेकिन अब कंपनी अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया में जुटी है। कंपनी का प्राथमिक उद्देश्य अपने बेड़े में मौजूद निष्क्रिय विमानों की मरम्मत कराकर उन्हें फिर से ऑपरेशनल बनाना, नए रूट्स पर कनेक्टिविटी बढ़ाना और उड़ानों के समय की पाबंदी (On-Time Performance) में सुधार करना है।

यात्रियों के भरोसे और ऑन-टाइम परफॉर्मेंस को सुधारने की चुनौती

बीते कुछ समय में फ्लाइट कैंसिल होने, देरी और तकनीकी दिक्कतों के कारण स्पाइसजेट के घरेलू मार्केट शेयर में गिरावट दर्ज की गई थी। अब एयरलाइन अपने ऑपरेशनल नेटवर्क को दुरुस्त कर यात्रियों का विश्वास दोबारा हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। लीज विवादों के क्रमिक समाधान से एयरलाइन को अपने विमानों का संचालन सुचारू रखने में मदद मिलेगी, जिससे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच उड़ानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जा सकेगी।

अन्य लेसरों के साथ भी जारी है सुलह की बातचीत

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइसजेट इससे पहले भी एयरकैसल (Aircastle), सेलेस्टियल एविएशन (Celestial Aviation) और अल्टरना एयरक्राफ्ट (Alterna Aircraft) जैसे कई अंतरराष्ट्रीय लेसरों के साथ आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट सफलतापूर्वक कर चुकी है। वर्तमान में अन्य लंबित याचिकाओं को लेकर भी एयरलाइन लगातार सकारात्मक संवाद स्थापित कर रही है। लीगल विवादों के तेजी से निपटारे से एयरलाइन को नई फंडिंग जुटाने और संचालन को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में रीजनल कनेक्टिविटी को मिलेगा सहारा

लखनऊ, वाराणसी, जयपुर, पटना, अयोध्या, दरभंगा और गोवा जैसे उभरते पर्यटन व व्यापारिक केंद्रों के लिए स्पाइसजेट एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी विकल्प रही है। उड़ानों के सामान्य होने और फ्लीट के एक्टिव होने से इन क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों को सस्ती और सीधी उड़ानों के अधिक विकल्प मिल सकेंगे, जिससे त्योहारी सीजन से पहले हवाई किराए के दबाव को भी संतुलित करने में मदद मिलेगी।

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