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Strait of Hormuz conflict : ईरान ने दुनिया के सामने रखी सबसे बड़ी शर्त, ट्रंप के अल्टीमेटम को ठेंगा दिखाकर दी बड़ी चेतावनी

News India Live, Digital Desk: खाड़ी के देशों में जारी महायुद्ध की आहट के बीच ईरान ने वैश्विक समुद्री व्यापार की लाइफलाइन मानी जाने वाली ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। अमेरिका के कड़े रुख और डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए अंतिम अल्टीमेटम के बावजूद ईरान ने झुकने के बजाय पलटवार किया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते को सुचारू रखने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उसने एक ऐसी कड़ी शर्त रख दी है जिसने वॉशिंगटन से लेकर यूरोपीय देशों तक खलबली मचा दी है।आखिर क्या है ईरान की वो ‘इकलौती शर्त’?ईरान के रणनीतिकारों और सैन्य नेतृत्व का कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के पक्षधर हैं, बशर्ते उनके अपने राष्ट्रीय हितों पर कोई आंच न आए। ईरान ने शर्त रखी है कि यदि पश्चिमी देश उसकी अर्थव्यवस्था पर लगे कड़े प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाते हैं और उसके तेल निर्यात में कोई बाधा नहीं डालते, तभी होर्मुज के रास्ते से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। ईरान ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उसे आर्थिक रूप से दबाया गया, तो वह इस महत्वपूर्ण रास्ते को पूरी तरह से सील करने की ताकत रखता है।ट्रंप की धमकियों का असर बेअसरअमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली नीतियों और उनके तीखे बयानों ने क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि उसने समुद्री रास्तों में बाधा पहुंचाई तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, ईरान के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि वह इन धमकियों से डरने वाला नहीं है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि अमेरिका की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति अब पुरानी हो चुकी है और वे किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।वैश्विक बाजार और भारत पर क्या होगा असर?होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने का मतलब है दुनिया के एक-तिहाई तेल व्यापार का ठप हो जाना। अगर ईरान अपनी शर्त पर अड़ा रहता है और रास्ता बंद होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 48 घंटे बेहद संवेदनशील हैं और पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं।

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