हॉर्मुज की लहरों पर अब टोल टैक्स का पहरा ईरान-ओमान वसूलेंगे 1.67 अरब का शुल्क, जानें भारत पर क्या होगा असर

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद आज, 8 अप्रैल 2026 को दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है। हालांकि, इस बार हॉर्मुज के रास्ते व्यापार करना पहले जैसा ‘फ्री’ नहीं होगा। ईरान और ओमान ने एक ऐतिहासिक और विवादित प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को ‘ट्रांजिट शुल्क’ यानी टोल टैक्स देना होगा।$2 Million (₹16.7 करोड़) प्रति जहाज: ईरान का ‘पुनर्निर्माण’ प्लानईरान के 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के अनुसार, हॉर्मुज से गुजरने वाले प्रत्येक बड़े जहाज (विशेषकर तेल टैंकरों) से लगभग 20 लाख डॉलर (करीब 16.7 करोड़ रुपये) का शुल्क वसूलने की योजना है।उद्देश्य: ईरान का कहना है कि इस राशि का उपयोग युद्ध के दौरान तबाह हुए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा।साझेदारी: चूंकि यह जलमार्ग ईरान और ओमान दोनों की क्षेत्रीय सीमाओं में आता है, इसलिए राजस्व का एक हिस्सा ओमान को भी मिल सकता है।ऐतिहासिक बदलाव: ‘फ्री वॉटरवे’ से ‘टोल रूट’ तकदशकों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता रहा है, जहाँ से बिना किसी शुल्क के व्यापारिक जहाज गुजरते थे। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यह पहली बार है जब पनामा और स्वेज नहर की तर्ज पर इस प्राकृतिक जलमार्ग पर टैक्स लगाने की बात की गई है। हालांकि, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।भारत की चुनौती: तेल होगा महंगा, शिपिंग लागत में उछालभारत के लिए यह खबर ‘राहत और चिंता’ दोनों लेकर आई है।राहत: जलमार्ग खुलने से ऊर्जा आपूर्ति का संकट टलेगा। भारत को युद्धविराम के बाद ईरानी तेल की पहली खेप मिलने की उम्मीद है।चिंता: यदि $2 मिलियन प्रति जहाज का भारी-भरकम टैक्स लागू होता है, तो भारत आने वाले कच्चे तेल की लैंडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी। इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय निर्यातक संगठन (FIEO) के अनुसार, टैक्स और बढ़े हुए इंश्योरेंस प्रीमियम के कारण लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी होगी।बाज़ार का हाल: तेल की कीमतों में भारी गिरावटयुद्धविराम की खबर लगते ही वैश्विक तेल बाजार में भारी गिरावट देखी गई। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 13.8% गिरकर $94.27 प्रति बैरल पर आ गईं, जबकि अमेरिकी क्रूड $95.55 पर लुढ़क गया। निवेशकों को उम्मीद है कि हॉर्मुज खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सुचारू हो जाएगी, जिससे पिछले एक महीने से बढ़ी हुई कीमतें अब नियंत्रण में आएंगी।